बनीखेत स्थित निरंकारी सत्संग भवन में हुआ साप्ताहिक सत्संग, महात्मा देवी लाल ने संगत को दिए आध्यात्मिक संदेश

बनीखेत स्थित निरंकारी सत्संग भवन में हुआ साप्ताहिक सत्संग, महात्मा देवी लाल ने संगत को दिए आध्यात्मिक संदेश

डलहौजी/चम्बा 11 मई मुकेश कुमार ( गोल्डी)

आज स्थानीय निरंकारी सत्संग भवन, बनीखेत में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन भक्तिभाव और श्रद्धा के वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा देवी लाल ने उपस्थित संगत को आध्यात्मिक प्रवचन प्रदान किए। उन्होंने फरमाया कि इंसानी जीवन का मूल उद्देश्य परमात्मा की जानकारी प्राप्त करना है, जो केवल पूर्ण सतगुरु की शरण में जाकर ही संभव होता है।

महात्मा ने कहा कि संसार में जो भी उथल-पुथल चलती है, वह उस व्यक्ति को प्रभावित नहीं कर सकती जिसने इस निराकार परमसत्ता को जान लिया हो। उन्होंने समझाया कि प्रकृति के कण-कण में परमात्मा की उपस्थिति का आभास होता है, लेकिन मनुष्य भौतिक सुखों के पीछे भागते हुए इस आनंद से वंचित रह जाता है। जो संत-महापुरुष अपने जीवन के हर कार्य में परमात्मा को शामिल करते हैं, वही सच्चे आनंद का अनुभव करते हैं। उनके जीवन में अहंकार का स्थान नहीं होता, और वे विनम्रता व परोपकार की भावना से सदैव ओतप्रोत रहते हैं।

महात्मा देवी लाल ने आगे कहा कि जीवन जीने का सही तरीका यही है कि हम अपने हर पल में इस निराकार परमात्मा को बसाएं। यही भक्ति का मार्ग है, और घर-परिवार में रहकर, कामकाज करते हुए भी एक संत की तरह जीवन जिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें परमात्मा को सिर्फ दुःख में नहीं, बल्कि सुख में भी याद करना चाहिए। जब जीवन की परिस्थितियां प्रतिकूल हों, तब भी इसी परमसत्ता का सहारा लेकर स्थिरता प्राप्त की जा सकती है।

उन्होंने ब्रह्मज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैसे पक्षी को उड़ान भरने के लिए दो पंखों की आवश्यकता होती है, वैसे ही आध्यात्मिक जीवन के लिए ज्ञान और कर्म दोनों आवश्यक हैं। अंत में संगत ने भजन और कविता के माध्यम से परमात्मा की महिमा का गुणगान किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!