एआईएसईसी ने एनईपी 2020 के विकल्प के रूप में ‘जन शिक्षा नीति 2025’ का मसौदा जारी किया

एआईएसईसी ने एनईपी 2020 के विकल्प के रूप में ‘जन शिक्षा नीति 2025’ का मसौदा जारी किया

डलहौजी/चंबा 23 मई मुकेश कुमार (गोल्डी)

अखिल भारतीय शिक्षा बचाओ समिति (एआईएसईसी) ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर ‘जन शिक्षा नीति 2025’ (पीपल्स एजुकेशन पॉलिसी 2025) का मसौदा जारी किया है। इस बात की जानकारी बीते कल लोक निर्माण विभाग के विश्रामगृह डलहौजी में अखिल भारतीय एग्जीक्यूटिव कमिटी की सदस्य तथा हिमाचल प्रभारी रितु कौशिक ने दी बता दें कि यह नीति केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी 2020) के विकल्प के रूप में प्रस्तुत की गई है। जन शिक्षा नीति 2025 का उद्देश्य एक समावेशी, धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाली सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली की स्थापना करना है।

इसमें शिक्षा को 3 से 18 वर्ष की उम्र तक अनिवार्य बनाने, शिक्षा बजट को केंद्र स्तर पर जीडीपी के 10% और राज्यों में 20-25% तक बढ़ाने की सिफारिश की गई है, और 10+2 शिक्षा प्रणाली की पुनर्स्थापना की मांग की गई है।मसौदे में एनईपी द्वारा प्रस्तावित 5+3+3+4 ढांचे, चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (एफवाईयूपी), और केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षाओं (सीयूईटी/नीट) का विरोध किया गया है। इसमें विदेशी विश्वविद्यालयों की भारत में अनुमति, ऑनलाइन शिक्षण मॉडल और शिक्षकों की ठेके पर नियुक्तियां न करने का सुझाव दिया है जन शिक्षा नीति 2025 मातृभाषा में शिक्षा, स्थानीय शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षा में जन भागीदारी और विकेंद्रीकरण को प्राथमिकता देता है।

इसमें शिक्षकों को सुविधादाता नहीं बल्कि मार्गदर्शक की भूमिका में देखने की पैरवी की गई है, और उन्हें सम्मानजनक वेतन देने की सिफारिश की गई है।एआईएसईसी ने कहा है कि यह मसौदा देशभर में जन-संवाद और प्रतिक्रियाओं के लिए खुलेगा, और अंतिम नीति जनवरी 2026 में बेंगलुरु में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय जन संसद में प्रस्तुत की जाएगी। हिमाचल प्रदेश में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि शिक्षा को सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित बनाया जा सके।

इस आयोजन में अखिल भारतीय एग्जीक्यूटिव कमिटी की सदस्य तथा हिमाचल प्रभारी रितु कौशिक विशेष तौर पर मौजूद रहे इसके अलावा नंदिनी शर्मा, प्रमोद कुमार रामानंद अमित कुमार ओम आजाद के अलावा अन्य के गणमान्य मौजूद रहे।

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