बनीखेत के होटल व्हाइट ऑर्किड की लिफ्ट विवाद ने पकड़ा कानूनी तूल, कंपनी पर गंभीर लापरवाही के आरोप

बनीखेत के होटल व्हाइट ऑर्किड की लिफ्ट विवाद ने पकड़ा कानूनी तूल, कंपनी पर गंभीर लापरवाही के आरोप

अनुबंध उल्लंघन, मेंटेनेंस में घोर चूक और शिकायतों की अनदेखी पर विधिक नोटिस जारी, कार्रवाई की चेतावनी

डलहौजी / चम्बा 07 अप्रैल मुकेश कुमार (गोल्डी)

बनीखेत स्थित होटल व्हाइट ऑर्किड में स्थापित लिफ्ट के लगातार खराब रहने का मामला अब कानूनी स्तर तक पहुंच गया है। होटल प्रबंधन की ओर से संबंधित लिफ्ट कंपनी को विधिक नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस हमीरपुर स्थित फर्म मैसर्स विमांशू एलीवेटर एंड एस्केलेटर को भेजा गया है, जिसमें कंपनी पर अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन, रखरखाव में लापरवाही और सेवा में कमी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। साथ ही, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत क्षतिपूर्ति की मांग भी की गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, होटल प्रबंधन ने जून 2024 में उक्त कंपनी से VDN001 MRL मॉडल की लिफ्ट खरीदी और स्थापित करवाई थी। स्थापना के समय कंपनी ने पांच वर्षों तक निःशुल्क मेंटेनेंस सेवा देने का आश्वासन दिया था।

इसके बावजूद, लिफ्ट पिछले दो महीनों से अधिक समय से खराब पड़ी है और 15 जनवरी 2026 से पूरी तरह बंद है, जिससे होटल के संचालन पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।होटल प्रबंधन का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कंपनी ने समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। टेलीफोन और अन्य माध्यमों से संपर्क करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। प्रबंधन का कहना है कि कंपनी जानबूझकर अपनी अनुबंधित जिम्मेदारियों से बच रही है और तकनीकी खामियों को छिपाने का प्रयास कर रही है।लिफ्ट के लंबे समय से बंद रहने के कारण पर्यटन सीजन में होटल को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, साथ ही प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा है। मेहमानों और कर्मचारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा, जिससे मानसिक तनाव की स्थिति बनी रही।जारी विधिक नोटिस में कंपनी से मांग की गई है कि निर्धारित समयावधि के भीतर लिफ्ट को पूर्ण रूप से चालू किया जाए, अनुबंध के अनुसार नियमित मेंटेनेंस सेवा सुनिश्चित की जाए और हुए नुकसान की भरपाई की जाए।

नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि समयसीमा के भीतर मांगें पूरी न होने पर उपभोक्ता आयोग सहित सक्षम न्यायालयों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होगी।इस मामले को पहले ही हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के विद्युत प्रभाग के समक्ष भी उठाया जा चुका है, जहां लिफ्ट और संबंधित विद्युत व्यवस्थाओं की जांच की मांग की गई है। यह प्रकरण अब केवल एक होटल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेश में निजी लिफ्ट स्थापना कंपनियों की जवाबदेही और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।

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