बनीखेत में निरंकारी सत्संग आयोजित, महात्मा तिलक राज डोगरा ने दिए आध्यात्मिक जीवन के संदेश

बनीखेत में निरंकारी सत्संग आयोजित, महात्मा तिलक राज डोगरा ने दिए आध्यात्मिक जीवन के संदेश

डलहौजी/चम्बा 07 अप्रैल मुकेश कुमार (गोल्डी)

बनीखेत स्थित स्थानीय निरंकारी सत्संग भवन में आज एक आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रचार टूर कार्यक्रम के अंतर्गत पहुंचे चंबा-कांगड़ा क्षेत्र के क्षेत्रीय संचालक महात्मा तिलक राज डोगरा जी ने अपने प्रवचनों के माध्यम से मानव जीवन, भक्ति और परमात्मा की पहचान पर विस्तार से प्रकाश डाला।महात्मा डोगरा ने कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जो परमात्मा को जानने के बाद निःस्वार्थ भाव और बिना किसी भय के की जाती है। उन्होंने बताया कि परमात्मा ब्रह्मांड के कण-कण में व्याप्त है और हर धर्म ग्रंथ इसी सत्य की पुष्टि करता है। परमात्मा की सही पहचान होने पर मनुष्य के भीतर से भय, स्वार्थ और अहंकार समाप्त हो जाते हैं, जिससे नकारात्मक सोच भी स्वतः दूर हो जाती है।उन्होंने आगे कहा कि सभी मनुष्य एक ही परमपिता परमात्मा की संतान हैं और मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। मनुष्य जीवन को अनमोल बताते हुए उन्होंने कहा कि जीते-जी परमात्मा को पहचानना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए। बाहरी रूप नहीं, बल्कि आत्मिक पहचान ही असली पहचान है, और व्यक्ति के व्यवहार से ही उसके चरित्र का आकलन होता है।सत्संग में यह भी बताया गया कि जीवन के हर पल में परमात्मा को स्मरण करना ही सच्ची भक्ति है। चाहे सुख का समय हो या दुख का, हर परिस्थिति में परमात्मा को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। अंत में महात्मा डोगरा ने कहा कि ब्रह्मज्ञान और कर्म एक पक्षी के दो पंखों की तरह हैं, जिनके संतुलन से ही जीवन की सही उड़ान संभव है।

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