बनीखेत निरंकारी सत्संग में आध्यात्मिक संदेशों की गूंज, मानवता व सच्ची भक्ति पर दिया जोर

बनीखेत निरंकारी सत्संग में आध्यात्मिक संदेशों की गूंज, मानवता व सच्ची भक्ति पर दिया जोर

डलहौजी/चम्बा 24 मई मुकेश कुमार (गोल्डी)

रविवार को बनीखेत स्थित निरंकारी सत्संग भवन में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ सत्संग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रचार टूर प्रोग्राम के तहत पहुंचे जोनल इंचार्ज महात्मा दुनी चंद जी ने संगत को आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से जीवन का सार समझाया।उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सच्चा भक्त हर समय निरंकार प्रभु के अहसास में जीवन जीता है। युगों-युगों से संत महापुरुष यही संदेश देते आए हैं कि मनुष्य को अपने जीवन को सत्य की रोशनी से जोड़कर संवारना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतजन जहां समाज कल्याण में योगदान देते हैं, वहीं आध्यात्मिक स्तर पर भी इंसानियत का विस्तार करते हैं, जिससे जीवन सार्थक बनता है।महात्मा दुनी चंद जी ने स्पष्ट किया कि भक्ति का अर्थ सामाजिक जिम्मेदारियों से दूर भागना नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के साथ जुड़कर ईश्वर का स्मरण करना ही सच्ची भक्ति है

उन्होंने कहा कि भक्ति का कोई निश्चित समय या स्थान नहीं होता, बल्कि यह जीवन के हर क्षण में अनुभव की जा सकती है।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एक फूल अपनी खुशबू बिना किसी प्रयास के चारों ओर फैलाता है, वैसे ही सच्ची भक्ति भी बिना दिखावे के सहज रूप से जीवन में प्रकट होती है। यदि कोई व्यक्ति केवल दिखावे के लिए सत्संग में आता है, तो वह वास्तविक भक्ति से दूर रहता है। सच्ची भक्ति तभी संभव है जब मन, वचन और कर्म से परमात्मा के साथ एकरूपता स्थापित हो।उन्होंने आगे कहा कि परमात्मा करुणा और प्रेम का असीम स्रोत है, जो हर जगह विद्यमान है। हमें भौतिक सुखों के साथ-साथ दूसरों के सुख का कारण बनना चाहिए और प्रभु का सदैव आभार व्यक्त करना चाहिए।सत्संग के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में डूबकर प्रवचनों का श्रवण किया और मानवता, प्रेम व सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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