शिमला जिला को बेसहारा पशु मुक्त बनाने की पहल, हर उपमंडल में समिति गठित

शिमला जिला को बेसहारा पशु मुक्त बनाने की पहल, हर उपमंडल में समिति गठित

शिमला 21 दिसम्बर चम्बा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)

जिला शिमला में सड़कों के किनारे घूम रहे बेसहारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने आज प्रत्येक उपमंडल स्तर पर समिति के गठन को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। इस समिति का उद्देश्य बेसहारा पशुओं को चिन्हित कर उन्हें सुरक्षित रूप से नजदीकी गौशालाओं एवं पशु सदनों तक पहुंचाना है।अधिसूचना के अनुसार प्रत्येक उपमंडल में गठित समिति की अध्यक्षता संबंधित एसडीएम करेंगे। समिति में अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, खंड विकास अधिकारी, थाना प्रभारी, नगर निकाय अथवा पंचायत प्रतिनिधि, स्थानीय गौशाला या पशु आश्रय के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होंगे। वहीं वरिष्ठ पशु चिकित्सक को समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने-अपने उपमंडल क्षेत्र में 15 दिनों के भीतर बेसहारा पशुओं को एकत्र कर नजदीकी गौशालाओं में पहुंचाए।

इसके उपरांत की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 15 दिन बाद उपायुक्त को प्रस्तुत करनी होगी। उपायुक्त ने इस संबंध में 15 दिवसीय विशेष अभियान की अधिसूचना भी जारी की है, जिसे हर उपमंडल में एसडीएम की अध्यक्षता में धरातल पर लागू किया जाएगा।उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि जनवरी 2026 में जिला शिमला के सभी चिन्हित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बेसहारा पशुओं को गौ सदनों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि नव वर्ष में पूरा जिला बेसहारा पशु मुक्त बनाया जा सके।उन्होंने कहा कि पशुधन हमारी अमूल्य धरोहर है और इन्हें बेसहारा छोड़ना उचित नहीं है। हाल ही में पशुपालन विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पूरे जिले में 272 बेसहारा पशु चिन्हित किए गए हैं। जिला में मौजूद गौ सदनों की कुल क्षमता लगभग 3500 पशुओं की है, जिनमें से वर्तमान में करीब 2500 पशु रखे गए हैं। शेष क्षमता के अनुसार इन 272 पशुओं को नजदीकी गौ सदनों में पहुंचाया जाएगा।जिला प्रशासन ने पशु मालिकों से भी अपील की है कि वे अपने छोड़े गए पशुओं को स्वयं वापस लें, ताकि सर्दियों में पशुओं की जान को खतरा न हो और सड़क दुर्घटनाओं की घटनाओं पर भी रोक लगाई जा सके।

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