“हिमाचल के साथ खुला अन्याय, यह बजट नहीं बल्कि विश्वासघात है” :-जिलाध्यक्ष एडवोकेट सुरजीत भरमौरी

चम्बा 02 फरवरी मुकेश कुमार (गोल्डी)
16वें वित्त आयोग द्वारा हिमाचल प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान से वंचित किए जाने पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में चम्बा जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी सुरजीत भरमोरी ने इस निर्णय को हिमाचल प्रदेश के साथ किया गया अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक अन्याय करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से प्रदेश को हर वर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का सीधा नुकसान होगा, जबकि वर्ष 2026 से 2031 के बीच वित्त आयोग से हिमाचल को करीब 50 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी।जिलाध्यक्ष सुरजीत भरमौरी ने कहा कि यह निर्णय हिमाचल की जनता की उम्मीदों और भरोसे पर सीधा प्रहार है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदेश की जनता ने भाजपा को सातों लोकसभा सीटें देकर पूर्ण जनादेश दिया, लेकिन बदले में हिमाचल को न तो उसकी आवाज मिली, न आर्थिक सुरक्षा और न ही प्रदेश हितों की रक्षा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के सांसद दिल्ली में हिमाचल के अधिकारों और जरूरतों की पैरवी करने में पूरी तरह असफल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह बजट हिमाचल के विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि विनाश का दस्तावेज है और इसे प्रदेश के इतिहास में “काला दिवस” के रूप में याद किया जाएगा। जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश हाल के वर्षों में सदी की सबसे बड़ी आपदा से गुजर चुका है, इसके बावजूद बजट में प्रदेश के लिए कोई विशेष आर्थिक सहायता का प्रावधान नहीं किया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।सुरजीत शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने हिमाचल को अपना दूसरा घर बताया था। उन्होंने कहा कि आपदा के समय घोषित 1500 करोड़ रुपये की सहायता राशि आज तक प्रदेश को नहीं मिली है। यह स्थिति हर हिमाचली के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रदेश की जनता इस अन्याय को न भूलेगी और अपने हक के लिए हर स्तर पर आवाज बुलंद करेगी।