हिमाचल प्रदेश की 47 दवाओं के सैंपल फेल, बुखार-शुगर की दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं

शिमला 20 दिसम्बर चम्बा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)
हिमाचल प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएसओ) और राज्य दवा नियंत्रक विभाग की जांच में राज्य की 47 दवाओं समेत देशभर से लिए गए कुल 200 सैंपल्स में से कई गुणवत्ता मानकों पर फेल हो गए। इनमें बुखार, डायबिटीज, हृदय रोग और मिर्गी जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं शामिल हैं, जो लाखों लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाती हैं।नवंबर माह में जांच के दायरे में आईं ये दवाएं आम जीवन में व्यापक रूप से सेवन की जाती हैं। फेल सैंपल्स में पैरासिटामोल (बुखार निवारक), क्लोपिडोग्रेल और एस्पिरिन (हृदय रोग), मेटफॉर्मिन (डायबिटीज), रेमिप्रिल (ब्लड प्रेशर), सोडियम वैलप्रोएट (मिर्गी) और मेबेवेरिन हाइड्रोक्लोराइड जैसी दवाएं प्रमुख हैं। सिरमौर जिले के कालाअंब की एक कंपनी की रेमिप्रिल, ग्लाइमेप्राइड, प्रेडनिसोलोन और केटोरोलक समेत कई दवाएं फेल हुईं।

इसी तरह बद्दी, नालागढ़, बरोटीवाला, मानपुरा, पांवटा साहिब और सोलन की इकाइयों के सैंपल भी खराब पाए गए।जिला-वार ब्रेकअप में सोलन के 28, सिरमौर के 18 और ऊना की एक कंपनी के सैंपल फेल हुए। राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि सभी दोषी कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं। फेल दवाओं का बाजार से स्टॉक तुरंत वापस मंगवाया जाएगा और नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिसमें जुर्माना या लाइसेंस निलंबन शामिल हो सकता है।यह घटना हिमाचल की फार्मा हब की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है, जहां सैकड़ों यूनिट्स दवाएं बनाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी खामियां मरीजों की जान जोखिम में डाल सकती हैं। सरकार ने गुणवत्ता नियंत्रण को और सख्त करने का आश्वासन दिया है।