खराब मौसम के चलते डलहौजी की सीमावर्ती पंचायतों में मोबाइल नेटवर्क पूर्णता ठप, ग्रामीणों में भारी रोष

खराब मौसम के चलते डलहौजी की सीमावर्ती पंचायतों में मोबाइल नेटवर्क पूर्णता ठप, ग्रामीणों में भारी रोष

डलहौजी/ चम्बा 27 जनवरी मुकेश कुमार (गोल्डी)

उपमंडल डलहौजी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चुहन, सुदली, मोरनू एवं मेल में लगातार हो रही बारिश के कारण बीएसएनएल, एयरटेल और जिओ की मोबाइल नेटवर्क सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हो गई हैं। नेटवर्क ठप होने से क्षेत्रवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे लोगों में गहरा रोष और निराशा व्याप्त है।जानकारी के अनुसार भौगोलिक दृष्टि से ये पंचायतें जिला चंबा की सीमावर्ती पंचायतें हैं, जिनकी सीमाएं पंजाब और जम्मू-कश्मीर से भी लगती हैं। लंबे समय तक नेटवर्क सुविधा के अभाव में यहां के लोग जम्मू-कश्मीर की पोस्टपेड सिम खरीदकर उपयोग करने को मजबूर थे।

बाद में जब बीएसएनएल द्वारा क्षेत्र में टावर स्थापित कर सेवाएं शुरू की गईं, तो अधिकांश लोगों ने अपनी पुरानी सिम बंद कर बीएसएनएल की सेवाएं अपनाईं। हालांकि बीते कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते बीएसएनएल सहित अन्य निजी कंपनियों की सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं।नेटवर्क संकट के कारण आम लोगों को आपसी बातचीत में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं छात्र-छात्राएं ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित हो गए हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी, आपदा संबंधी सूचनाएं और प्रशासनिक निर्देशों तक पहुंच भी बाधित हो गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार बीएसएनएल कर्मचारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया, जिससे लोगों का आक्रोश और बढ़ गया है।इस नेटवर्क संकट से सीमावर्ती चार पंचायतों के दर्जनों गांव प्रभावित हो रहे हैं, जहां संचार सुविधाएं पहले से ही सीमित हैं। ऐसे में मोबाइल नेटवर्क का ठप होना ग्रामीण जीवन के लिए एक गंभीर समस्या बन गया है।

आपात स्थिति में संपर्क न हो पाना लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के साथ-साथ बीएसएनएल, एयरटेल और जिओ प्रबंधन से मांग की है कि इस समस्या का तत्काल और स्थायी समाधान किया जाए। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि शीघ्र ही नेटवर्क सेवाएं बहाल नहीं की गईं, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।

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