अनुसूचित जाति–जनजाति विकास निधि विशेष कानून की मांग को लेकर शिमला में धरना, झंडूता से 300 प्रतिनिधि होंगे शामिल

शिमला 29 दिसम्बर चम्बा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)
हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति विकास निधि विशेष कानून के गठन की मांग को लेकर आगामी बजट सत्र के दौरान सरकार को उसके चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वायदे की याद दिलाने के उद्देश्य से शिमला में धरना दिया जाएगा। यह जानकारी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति विकास निधि कानून के लिए राज्य गठबंधन की ओर से दी गई।इसी क्रम में 28 दिसंबर को जिला बिलासपुर की झंडूता विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत घंडीर में शिक्षाविद श्री ज्ञान सिंह गंभीर के आवासीय परिसर में राज्य गठबंधन द्वारा एक विधानसभा स्तरीय परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में झंडूता विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों से 96 प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की।परिचर्चा के दौरान सामाजिक-आर्थिक समानता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में सामाजिक क्रांति के रूप में भारतीय संविधान, मौलिक अधिकार एवं नीति निर्देशक सिद्धांत, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति उप-योजना के प्रावधान, उद्देश्यों और कार्यक्रमों, तथा इन योजनाओं को कानूनी रूप देने के लिए देश व प्रदेश स्तर पर चल रहे संघर्षों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त, जिन राज्यों में अनुसूचित जाति–जनजाति विकास निधि कानून लागू है, वहां समाज की शैक्षणिक व आर्थिक स्थिति में आए सकारात्मक बदलावों पर भी चर्चा हुई।इस अवसर पर सामाजिक आर्थिक समानता के लिए जन अभियान अध्यक्ष एवं राज्य गठबंधन के मेंटर प्रोफेसर के.एस. धीर, पूर्व आईएफएस अधिकारी डी.पी. चंद्रा, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता इंजीनियर एम.आर. धरोच, जिला समन्वयक श्री मंशाराम, प्रोफेसर सीताराम, प्रिंसिपल होशियार सिंह, डॉ. राजेंद्र पाल भाटिया, तथा सुखदेव विश्व प्रेमी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।परिचर्चा के दौरान सर्वसम्मति से “अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति विकास निधि कानून के लिए झंडूता विधानसभा स्तरीय कमेटी” का गठन किया गया, जिसमें प्रत्येक पंचायत से महिला-पुरुष, युवा-युवती तथा छात्र-छात्राओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया।शिक्षाविद ज्ञान सिंह गंभीर ने बताया कि शिमला में प्रस्तावित धरने में झंडूता विधानसभा कमेटी की ओर से 300 प्रतिनिधि भाग लेकर सरकार पर कानून बनाने का दबाव