बजट 2026–27, उपभोग से उत्पादकता की ओर भारत की निर्णायक छलांग

भरमौर /चम्बा 04 फरवरी मुकेश कुमार (गोल्डी)
केंद्रीय बजट 2026–27 भारत की आर्थिक दिशा में एक स्पष्ट और साहसिक बदलाव का संकेत देता है। यह बजट इस मूल मान्यता पर आधारित है कि दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और सतत विकास के लिए देश को उपभोग-आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर उत्पादकता-आधारित मॉडल अपनाना होगा। कुल ₹53.47 लाख करोड़ के अनुमानित व्यय के साथ यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में 7.7 प्रतिशत अधिक है, जबकि राजकोषीय घाटे को 4.3 प्रतिशत पर सीमित रखा गया है। यह वित्तीय अनुशासन और विकास के संतुलन को दर्शाता है।सरकार ने ऋण-जीडीपी अनुपात को 55.6 प्रतिशत तक लाने के साथ 2030 तक इसे 50 प्रतिशत (±1%) पर स्थिर करने का लक्ष्य रखा है। इससे आर्थिक स्थिरता की मजबूत नींव तैयार होती है। अब तक आर्थिक वृद्धि का बड़ा आधार उपभोग रहा, लेकिन बजट 2026–27 इस सोच से आगे बढ़ते हुए पूंजीगत व्यय को रिकॉर्ड ₹12.2 लाख करोड़ तक ले गया है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण और रोजगार को नई गति मिलेगी। यह ‘विकसित भारत 2047’ के रोडमैप के रूप में सामने आता है।कृषि क्षेत्र में बजट का फोकस उत्पादन से उत्पादकता की ओर है। सिंचाई, भंडारण, मूल्य संवर्धन और कृषि अनुसंधान में निवेश से किसानों को कृषि उद्यमी बनाने की दिशा तय की गई है। वहीं, युवाओं के लिए कौशल विकास, स्टार्ट-अप, डिजिटल अर्थव्यवस्था और एमएसएमई को बढ़ावा देकर उन्हें रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजक बनाने की रणनीति अपनाई गई है।महिलाओं को कल्याण की लाभार्थी से आगे बढ़ाकर आर्थिक नेतृत्व की भूमिका में लाने पर विशेष ज़ोर दिया गया है। स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता और वित्तीय समावेशन से महिला श्रम भागीदारी बढ़ेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश को मानव पूंजी के रूप में देखा गया है, जिससे दीर्घकालिक उत्पादकता में वृद्धि होगी।निर्यात, रक्षा और अनुसंधान में निवेश के माध्यम से भारत को वैश्विक आपूर्तिकर्ता और ज्ञान-आधारित शक्ति बनाने की दिशा में यह बजट एक मजबूत कदम है। कुल मिलाकर, बजट 2026–27 तात्कालिक लोकलुभावन उपायों से आगे बढ़कर राष्ट्र की दीर्घकालिक क्षमता निर्माण का दस्तावेज़ बनकर उभरा है।