सरकारी अस्पतालों में पर्ची शुल्क से आम जनता में रोष ,समाजसेवी संस्थाओं और व्यापार मंडलों ने किया विरोध

सरकारी अस्पतालों में पर्ची शुल्क से आम जनता में रोष ,समाजसेवी संस्थाओं और व्यापार मंडलों ने किया विरोध

चंबा, 27 अक्तूबर मुकेश कुमार (गोल्डी)

जिला चंबा सहित उपमंडल डलहौजी, सलूणी, तीसा, भटियात और भरमौर में बीते कुछ समय से सरकारी अस्पतालों में पर्ची शुल्क के रूप में 10 रुपये वसूले जाने को लेकर आम जनता में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जहां पहले से ही महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ रखी है, वहीं अब सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर जनता से अतिरिक्त वसूली कर रही है।

जिला मुख्यालय पर प्रशांत, सुनील, विनोद, रणवीर, सुजाता तथा बीना कुमारी सहित कई लोगों ने बताया कि अस्पतालों में पहले से ही अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे तथा अन्य जांचों के लिए शुल्क लिया जा रहा था। अब पर्ची के नाम पर 10 रुपये वसूलना आम जनता के साथ ठगी के समान है। उन्होंने कहा कि जब स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर पहले ही गिरा हुआ है, तब इस प्रकार के शुल्क गरीबों के लिए बोझ बढ़ाने वाले हैं।

भरमौर, भटियात, तीसा, सलूणी और डलहौजी क्षेत्रों में भी लोग इस निर्णय से खासे नाराज हैं। स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं और व्यापार मंडलों ने इसे गरीब विरोधी कदम बताया है। उनका कहना है कि एक संपन्न व्यक्ति के लिए यह राशि मामूली हो सकती है, परंतु एक गरीब परिवार के लिए यह भी अतिरिक्त बोझ है। वे पहले ही दवाइयों और जांचों के खर्च से परेशान हैं, अब पर्ची शुल्क ने स्थिति और कठिन बना दी है।

इन संस्थाओं ने सरकार से मांग की है कि पर्ची शुल्क को तुरंत समाप्त किया जाए ताकि आम आदमी पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार को जनहित में इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

इस विषय पर जब सदर विधायक नीरज नायर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाया गया है। उनके अनुसार, मेडिकल कॉलेजों में प्रतिदिन हजारों की संख्या में ओपीडी होती है। पर्ची शुल्क से अर्जित राशि को अस्पतालों की सुविधाएं बढ़ाने में ही खर्च किया जाएगा। उन्होंने जनता से अपील की कि इस निर्णय को नकारात्मक रूप से न देखें, क्योंकि इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।

वहीं डलहौजी के विधायक ने हिमाचल प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में आयुष्मान भारत और हिमकेयर जैसी योजनाएं गरीबों के लिए वरदान साबित हुई थीं, जबकि मौजूदा सरकार हर क्षेत्र में जनता पर बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता की भावनाओं को समझते हुए इस शुल्क को तुरंत वापस लेना चाहिए। बता दें कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा मई 2025 को प्रदेश के सभी अस्पतालों में 10 रूपये पर्ची वसूलने आदेश जारी किए थे।

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