“विश्व गुरु” के दावे खोखले, अमेरिका के सामने झुकती मोदी सरकार ने देश की गरिमा गिराई :- मनीष सरीन

“विश्व गुरु” के दावे खोखले, अमेरिका के सामने झुकती मोदी सरकार ने देश की गरिमा गिराई :- मनीष सरीन

डलहौजी/चम्बा 06 मार्च मुकेश कुमार (गोल्डी)

डलहौज़ी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस कार्यकर्ता मनीष सरीन ने केंद्र की भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश और आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज देश की स्थिति ऐसी हो गई है कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अमेरिका की अनुमति का इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए दी गई सीमित और अस्थायी छूट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मोदी सरकार की तथाकथित मजबूत विदेश नीति और “विश्व गुरु” बनने के दावे की वास्तविकता को उजागर करता है।मनीष सरीन ने कहा कि भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कहा जाता है, लेकिन आज ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी देश को दूसरे देशों के फैसलों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उनके अनुसार यह स्थिति किसी भी संप्रभु राष्ट्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने विदेश नीति को गंभीर रणनीति के बजाय प्रचार और इवेंट मैनेजमेंट तक सीमित कर दिया है।सरीन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को मजबूत दिखाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता में आर्थिक और रणनीतिक फैसलों में भारत की स्वतंत्रता कमजोर होती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ हाल ही में उभरे टैरिफ विवाद और व्यापारिक दबावों का सीधा असर भारतीय किसानों, छोटे व्यापारियों और उद्योगों पर पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में खुली छूट मिलती है तो इसका सबसे अधिक नुकसान देश के किसानों को उठाना पड़ेगा। पहले से ही महंगाई, बढ़ती लागत और बाजार की अस्थिरता से जूझ रहे किसानों के लिए यह स्थिति और कठिन हो सकती है।मनीष सरीन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए यह मामला और भी संवेदनशील है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था कृषि, बागवानी और छोटे कारोबारों पर आधारित है। यदि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और टैरिफ नीतियों के कारण बाजार अस्थिर होता है तो इसका सीधा असर हिमाचल के किसानों और बागवानों पर पड़ेगा।उन्होंने केंद्र सरकार से जवाब मांगते हुए कहा कि आखिर क्यों भारत को अपनी ऊर्जा और व्यापार नीति तय करने के लिए दूसरे देशों की अनुमति का इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश की जनता जानना चाहती है कि “विश्व गुरु” के दावे करने वाली सरकार कब देश की आर्थिक और रणनीतिक स्वतंत्रता को वास्तव में मजबूत करेगी।

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