पांगी घाटी के कारीगरों की अनोखी कला ,लकड़ी की नक्काशी से जीवंत हो रही हिमाचल की संस्कृति

पांगी/ चम्बा 12 मार्च मुकेश कुमार (गोल्डी)
चंबा जिला की अति दुर्गम पांगी घाटी से एक बार फिर हिमाचल की समृद्ध कला और संस्कृति की अनूठी झलक सामने आई है। सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यहां के कारीगर अपने हुनर से ऐसी अद्भुत लकड़ी की नक्काशी तैयार कर रहे हैं, जो प्रदेश की पारंपरिक कला को नई पहचान दे रही है।हाल ही में विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान माँ बैरा वाली चामुण्डा मंदिर में पांगी घाटी के प्रतिभाशाली कारीगरों श्री मोती राम, रजनीश और उनके साथियों से मिलने का अवसर मिला। इस दौरान उनके द्वारा लकड़ी पर की जा रही बारीक नक्काशी को देखकर सभी प्रभावित हुए। इन कारीगरों के कुशल हाथों से तैयार की गई कलाकृतियां हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक संस्कृति, धार्मिक आस्था और लोक जीवन की झलक प्रस्तुत करती हैं।

दुर्गम क्षेत्र में रहने के कारण इन कलाकारों को संसाधनों, प्रशिक्षण और बाज़ार की सीमित उपलब्धता जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वे अपने हुनर और मेहनत के बल पर इस पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं। उनकी कला यह साबित करती है कि सच्ची प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती।स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी इन कलाकारों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि पांगी के इन हुनरमंद कारीगरों को बेहतर अवसर, प्रशिक्षण और बाज़ार उपलब्ध करवाया जाए, ताकि उनकी कला देश-विदेश तक पहुंच सके। इससे न केवल इन कलाकारों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगी।

पांगी घाटी के ये मेहनती कारीगर अपने हाथों में सिर्फ औज़ार ही नहीं, बल्कि हिमाचल की संस्कृति और परंपरा की आत्मा भी संजोए हुए हैं। उनकी कला प्रदेश की पहचान और गर्व का प्रतीक बनती जा रही है। ऐसे प्रतिभाशाली कलाकारों को पहचान और सम्मान दिलाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।