डलहौजी पब्लिक स्कूल ने शिक्षक दिवस पर भव्य कला प्रदर्शनी का हुआ आयोजन

डलहौजी पब्लिक स्कूल ने शिक्षक दिवस पर भव्य कला प्रदर्शनी का हुआ आयोजन

डलहौजी, 06 सितंबर मुकेश कुमार (गोल्डी)

शिक्षक दिवस के अवसर पर बीते कल डलहौजी पब्लिक स्कूल ने एक भव्य कला प्रदर्शनी का आयोजन कर छात्रों की रचनात्मकता और कल्पना को मंच प्रदान किया। यह कार्यक्रम भारत के पूर्व राष्ट्रपति, दार्शनिक एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को समर्पित रहा।कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों के योगदान का सम्मान करने के साथ-साथ विद्यार्थियों की प्रतिभा को समाज के सामने प्रस्तुत करना था।

डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था, “सच्चे शिक्षक वे होते हैं जो हमें अपने बारे में सोचने की प्रेरणा देते हैं और बच्चों के जीवन को आकार देकर देश के भविष्य की नींव रखते हैं।” प्रदर्शनी ने इसी भावना को मूर्त रूप देते हुए बच्चों की कलात्मक अभिव्यक्तियों को उजागर किया।कला प्रदर्शनी का उद्घाटन वरिष्ठ कॉर्पोरेट प्रबंधक, महिंद्रा लाइफस्टाइल लिमिटेड के पूर्व प्रबंध निदेशक एवं प्रख्यात शिक्षाविद् सुवीर आहूजा ने किया। छात्रों की प्रस्तुतियों को देखकर उन्होंने कहा, “मैं यहां के बच्चों की रचनात्मकता से गहराई से प्रभावित हूं। ऐसे आयोजन न केवल कलात्मक कौशल को निखारते हैं बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और जीवन मूल्यों का भी विकास करते हैं जो उन्हें जीवनभर मार्गदर्शन देंगे।”इस अवसर पर डलहौजी पब्लिक स्कूल के चेयरमैन डॉ. (कैप्टन) जी.एस. ढिल्लों मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रिंसिपल श्री जतिंदर सिंह ने उनके साथ विद्यार्थियों की कला का अवलोकन किया और उनकी सराहना की।

डॉ. ढिल्लों ने कहा, “हमारे विद्यार्थियों ने अपनी कला के माध्यम से असाधारण कल्पनाशीलता और प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। यह प्रदर्शनी हमारे शिक्षकों के मार्गदर्शन से विकसित उनकी आंतरिक दुनिया का प्रतिबिंब है। मुझे गर्व है कि आज हमारे बच्चे शिक्षा के साथ रचनात्मकता में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।”कला प्रदर्शनी का सफल समन्वय श्री प्रदीप कुमार द्वारा किया गया, जिन्होंने छात्रों को प्रेरित कर उनकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभिन्न आयु वर्ग के विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई चित्रकला, रेखांकन और अन्य कला कृतियाँ प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र रहीं।कार्यक्रम का समापन छात्रों की उपलब्धियों की सराहना तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों और विद्यार्थियों के अटूट बंधन को पुनः स्मरण करने के साथ हुआ। इस अवसर ने यह संदेश दिया कि शिक्षक केवल ज्ञान के स्रोत नहीं बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के मार्गदर्शक भी हैं।

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