वक्फ संशोधन बिल मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला: दिलदार अली बट्ट

डलहौजी/ चम्बा 08 अप्रैल मुकेश कुमार ( गोल्डी)
वक्फ संशोधन बिल को लेकर प्रदेश हज कमेटी के पूर्व चेयरमैन दिलदार अली बट्ट ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन मुस्लिम समुदाय के हितों को प्रभावित करने वाला है और इससे वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ जाएगा।बट्ट ने कहा, “सरकार को वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन हेतु कानून बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इससे साफ है कि सरकार मुस्लिमों के अधिकारों को सीमित करना चाहती है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संशोधन के बाद वक्फ संपत्तियों की पहचान और नियंत्रण का अधिकार वक्फ ट्रिब्यूनल की बजाय जिलाधिकारी के पास चला जाएगा, जो कि उचित नहीं है।पूर्व चेयरमैन ने बताया कि पुराने कानून के अनुसार यदि कोई संपत्ति लंबे समय से वक्फ के उपयोग में रही हो, तो उसे वक्फ संपत्ति माना जा सकता था, भले ही दस्तावेज न हों। लेकिन नए संशोधन के बाद ऐसी संपत्तियों को ‘संदिग्ध’ माना जाएगा, जिससे विवाद बढ़ने की संभावना है।दिलदार अली बट्ट ने यह भी कहा कि अब वक्फ ट्रिब्यूनल में सीईओ के तौर पर गैर-मुस्लिम व्यक्ति की नियुक्ति की जा सकेगी, जबकि पहले यह पद केवल मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति को ही मिलता था। “बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना भी नाजायज है,” उन्होंने जोड़ा।उन्होंने आशंका जताई कि संशोधन के जरिए सरकार विवादित वक्फ संपत्तियों पर कब्जा कर सकती है, जिससे मुस्लिम समुदाय के हित प्रभावित होंगे। बट्ट ने कहा, “सरकार ने वक्फ कानून को मजबूत करने की बजाय कमजोर किया है। यदि सरकार वास्तव में वक्फ संपत्तियों को समुदाय के हित में उपयोग करना चाहती, तो उसमें जरूरतमंद मुस्लिम परिवारों के लिए स्पष्ट प्रावधान किए जाते।”उन्होंने अंत में कहा कि वक्फ कानून में किया गया यह संशोधन मुस्लिम समुदाय के हक छीनने की कोशिश है, जिस पर समुदाय को कड़ा ऐतराज है।