बनीखेत निरंकारी सत्संग भवन में साप्ताहिक सत्संग आयोजित, महात्मा कर्ण जी ने ईश्वर पहचान पर दिया संदेश

बनीखेत निरंकारी सत्संग भवन में साप्ताहिक सत्संग आयोजित, महात्मा कर्ण जी ने ईश्वर पहचान पर दिया संदेश

डलहौजी/चम्बा 08 फरवरी मुकेश कुमार(गोल्डी)

आज स्थानीय निरंकारी सत्संग भवन, बनीखेत में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और आध्यात्मिक विचारों से लाभान्वित हुए। कार्यक्रम के दौरान निरंकारी मिशन के महात्माओं द्वारा ईश्वर भक्ति, आत्मज्ञान और मानव जीवन के उद्देश्य पर सारगर्भित प्रवचन प्रस्तुत किए गए।सत्संग को संबोधित करते हुए महात्मा कर्ण ने कहा कि “जिसकी भक्ति और जिसकी पूजा की जाती है, उसका ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा कि सबसे पहले ईश्वर की पहचान आवश्यक है, क्योंकि बिना पहचान के भक्ति केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाती है।

उन्होंने समझाया कि मानव जीवन का सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि हर व्यक्ति जीवन की यात्रा तो कर रहा है, लेकिन उसे यह नहीं पता कि उसका अंतिम लक्ष्य क्या है और उसे जाना कहां है।महात्मा कर्ण जी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर केवल सतगुरु की शरण में जाकर ही प्राप्त होता है। जब सतगुरु अपनी कृपा से ब्रह्मज्ञान प्रदान करते हैं और आत्मा को परमात्मा से जोड़ देते हैं, तब मनुष्य को अपने जीवन के उद्देश्य की सही समझ आती है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान के माध्यम से निराकार प्रभु का साक्षात्कार होता है और यह बोध होता है कि मानव जीवन का एकमात्र लक्ष्य प्रभु-प्राप्ति है।प्रवचन में बताया गया कि निरंकार प्रभु कण-कण में व्याप्त है, वह निराकार और बेरंग है।

उसके ज्ञान और एहसास में रहकर जीवन को सहज, सरल और शांतिपूर्ण बनाया जा सकता है। ऐसे आध्यात्मिक ज्ञान से मनुष्य में प्रेम, सहनशीलता और मानवता के गुण विकसित होते हैं।इस अवसर पर डलहौजी ब्रांच के संयोजक महात्मा एच. एस. गुलेरिया विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निरंकारी मिशन मानवता, भाईचारे और विश्व बंधुत्व का संदेश देता है। सत्संग का समापन सामूहिक प्रार्थना के साथ किया गया।

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