हिमाचली लोक गायक इंद्रजीत को मिला ‘हिमाचल रत्न’ सम्मान, ईशा देओल ने किया सम्मानित

हिमाचली लोक गायक इंद्रजीत को मिला ‘हिमाचल रत्न’ सम्मान, ईशा देओल ने किया सम्मानित

शिमला 28 जून चंबा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो )

उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित एक्सीलेंस आईकॉनिक अवार्ड 2025 समारोह में हिमाचल प्रदेश के सुप्रसिद्ध लोक गायक इंद्रजीत को ‘हिमाचल रत्न’ अवॉर्ड से नवाजा गया। यह सम्मान बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री ईशा देओल के हाथों उन्हें प्रदान किया गया। इस समारोह में देशभर से विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।इंद्रजीत, जो कि कुल्लू-मनाली की वादियों में बसे एक छोटे से गांव दोगरी से ताल्लुक रखते हैं, आज हिमाचल की लोकसंस्कृति का एक वैश्विक चेहरा बन चुके हैं।

12 मार्च 1992 को जन्मे इंद्रजीत ने संगीत की राह बिना किसी गुरु और संसाधन के खुद तय की। मात्र 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने लिखे और कंपोज किए गए 10 गीतों की पहली वीडियो एल्बम ‘दिल का क्या कसूर’ CD पर लॉन्च की। यह वह समय था जब डिजिटल प्लेटफॉर्म का चलन नहीं था, फिर भी उनकी सोच आगे की थी।इंद्रजीत ने हिमाचल की मिट्टी, बोली, वेशभूषा और संस्कृति को केंद्र में रखते हुए लोकसंगीत को एक नई पहचान दी। उनका सुपरहिट गीत ‘हाड़े मेरे मामुआ’ (2016) ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद ‘लाड़ी शाऊणी’, ‘पाखली माणू’, ‘बुधुआ मामा’, ‘साजा लागा माघे रा’ जैसे गीतों ने करोड़ों दर्शकों का दिल जीत लिया।

उनके गीत केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी माध्यम हैं। ‘अठारह करडू’ जैसे गीत देवसंस्कृति को समर्पित हैं, तो ‘मता केरदे नशा’ युवाओं को नशामुक्त जीवन की प्रेरणा देता है। उन्होंने हिमाचल के छह बार मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह पर भी एक मार्मिक गीत प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर स्वयं वीरभद्र सिंह भावुक हो गए थे।100 से अधिक गीतों और देश-विदेश में मंचों पर दी गई प्रस्तुतियों के माध्यम से इंद्रजीत ने न केवल हिमाचल की लोकसंस्कृति को जीवित रखा, बल्कि उसे वैश्विक पहचान भी दिलाई। ‘हिमाचल रत्न’ सम्मान को उन्होंने अपने चाहने वालों और पूरे हिमाचल प्रदेश को समर्पित किया। इंद्रजीत आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं — जो यह सिखाते हैं कि अपनी जड़ों से जुड़कर भी आसमान छुआ जा सकता है।

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