बनीखेत में आयोजित निरंकारी सत्संग में महात्मा तिलक राज डोगरा ने दिए जीवन मूल्यों पर प्रेरणादायक संदेश

बनीखेत में आयोजित निरंकारी सत्संग में महात्मा तिलक राज डोगरा ने दिए जीवन मूल्यों पर प्रेरणादायक संदेश

डलहौजी/चंबा 25 मई मुकेश कुमार (गोल्डी )

स्थानीय निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में साप्ताहिक निरंकारी सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें चंबा-कांगड़ा के क्षेत्रीय संचालक महात्मा तिलक राज डोगरा ने प्रवचन करते हुए श्रद्धालुओं को मानवता, भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश दिया।अपने प्रेरणादायक प्रवचनों में डोगरा जी ने कहा कि “भक्ति केवल परमात्मा को जानकर ही संभव है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति निःस्वार्थ और भयमुक्त होनी चाहिए। परमात्मा संपूर्ण ब्रह्मांड के कण-कण में समाया हुआ है और हर धर्मग्रंथ ने इसी सत्य को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि जब परमात्मा का ज्ञान प्राप्त होता है तो मनुष्य के भीतर से भय, स्वार्थ और अहंकार समाप्त हो जाते हैं।

महात्मा जी ने जोर देकर कहा कि मानव जीवन अनमोल है और जीते जी ही परमात्मा को जानना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि केवल शरीर ही हमारी पहचान नहीं है, बल्कि आत्मिक चेतना ही वास्तविक पहचान है। मनुष्य के व्यवहार से ही पता चलता है कि वह मानव है, दानव है या फरिश्ता।उन्होंने कहा कि “मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होता,” और जब मन में परमात्मा का वास होता है तो अपने आप करुणा, प्रेम, सहनशीलता, अपनत्व जैसे गुण विकसित होते हैं।

सत्संग में उन्होंने यह भी बताया कि ब्रह्मज्ञान के साथ कर्म भी आवश्यक है, जैसे पक्षी की उड़ान के लिए दोनों पंख जरूरी होते हैं।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

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