अंतर्राष्ट्रीय मिंजर मेला-2025 की सांस्कृतिक उप समिति की बैठक आयोजित

चंबा, 23 जून मुकेश कुमार (गोल्डी)
अंतर्राष्ट्रीय मिंजर मेला-2025 की तैयारियों के अंतर्गत आज उपायुक्त कार्यालय चंबा के सभागार में सांस्कृतिक उप समिति की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी एवं सांस्कृतिक उप समिति के संयोजक अमित मैहरा ने की। बैठक में समिति के सरकारी व गैर सरकारी सदस्यों ने भाग लिया।बैठक में मिंजर मेले के दौरान आयोजित की जाने वाली सांस्कृतिक संध्याओं और कलाकारों के चयन को लेकर व्यापक चर्चा हुई। अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी अमित मैहरा ने निर्देश दिए कि समिति के गैर सरकारी सदस्य जन-रुचि को ध्यान में रखते हुए कलाकारों की एक संभावित सूची तैयार करें, ताकि कार्यक्रम जनभावनाओं के अनुरूप हो। बैठक में मंच साज-सज्जा, स्टेज लाइटिंग, साउंड व्यवस्था, आर्केस्ट्रा और स्थानीय कलाकारों को मंच देने जैसे अहम विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।इस दौरान गैर सरकारी सदस्य भूपेंद्र सिंह जसरोटिया ने मेले के दौरान पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा नशे के खिलाफ जन-जागरूकता हेतु संदेश देने का सुझाव देते हुए एक ज्ञापन भी सौंपा। बैठक में यह जानकारी दी गई कि दस लाख से अधिक मानदेय वाले कलाकारों की प्रस्तुति हेतु अनुमति प्रदेश सरकार से ली जाएगी, वहीं जिला श्रेणीबद्ध कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस अवसर पर ज़िला भाषा अधिकारी तुकेश शर्मा सहित अन्य सदस्य—कृर्तार ठाकुर, हेम ठाकुर, के.एस. प्रेमी, हामिद खान, जितेंद्र सूर्या, नरेश राणा, लियाक़त अली, कपिल भूषण व हर्ष शर्मा भी उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने अपने विचार और सुझाव सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर साझा किए।
-: मिंजर मेले की सांस्कृतिक संध्याओं में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता कैसे सुनिश्चित की जाएगी?स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता देने के लिए सांस्कृतिक उप समिति जिला स्तर पर पंजीकृत एवं श्रेणीबद्ध कलाकारों की सूची का प्रयोग करेगी। साथ ही प्रस्तावित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। इससे स्थानीय कला-संस्कृति को मंच और पहचान दोनों मिलेंगी।
-: क्या सांस्कृतिक आयोजनों में पारंपरिक चंबयाली लोक कलाओं को भी प्रमुखता दी जाएगी?हां, बैठक के दौरान यह प्रस्ताव भी आया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पारंपरिक चंबयाली नृत्य, गीत, वाद्य यंत्रों और वेशभूषा को प्रमुखता दी जाए, ताकि मेले की सांस्कृतिक पहचान बनी रहे और नई पीढ़ी उससे जुड़ सके।
-: पौधारोपण और नशा मुक्ति जैसे सामाजिक संदेश सांस्कृतिक मेले में कैसे जोड़े जाएंगे?सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के दौरान संदेश आधारित लघुनाटिकाएं, पोस्टर प्रदर्शनी, रंगोली प्रतियोगिता तथा मंच संचालन के माध्यम से इन विषयों को रचनात्मक ढंग से जोड़ा जाएगा। साथ ही खेल प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे युवाओं के माध्यम से भी ये संदेश फैलाए जाएंगे।