संत निरंकारी भवन बनीखेत में हुआ साप्ताहिक सत्संग सतगुरु की कृपा से होती है ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति:- बहन वंदना

संत निरंकारी भवन बनीखेत में हुआ साप्ताहिक सत्संग सतगुरु की कृपा से होती है ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति:- बहन वंदना

डलहौजी/ चम्बा 29 जून, मुकेश कुमार (गोल्डी)

रविवार को सन्त निरंकारी सत्संग भवन, बनीखेत में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में बहन वंदना ने आई हुई साध संगत को संबोधित करते हुए सतगुरु और ब्रह्मज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सतगुरु की कृपा से ही जीव को ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति होती है, और यही सतगुरु की पहचान होती है कि वह क्षण भर में आत्मा को परमात्मा से मिला देता है।उन्होंने कहा कि जब इंसान परमात्मा को पहचानता है, तभी उसे अपने असली स्वरूप का बोध होता है कि वह आत्मिक रूप से उसी परम सत्ता का अंश है। एकत्व का यह अनुभव इंसान को समभाव और प्रेम से जीना सिखाता है। वंदना ने बताया कि जब परमात्मा को जानकर प्रेमभाव से भक्ति की जाती है, तो वह प्रेमा-भक्ति का रूप ले लेती है।विचरण करते समय यदि हर व्यक्ति को परमात्मा का अंश मानकर देखा जाए, तो समाज से भेदभाव अपने आप समाप्त हो सकता है। निःस्वार्थ सेवा, सहयोग और समर्पण भाव ही सच्चे मानव जीवन की परिभाषा हैं।

वंदना जी ने कहा कि सच्चा इंसान वह है जो केवल शरीर से नहीं, बल्कि व्यवहार और सोच से भी मानवता को दर्शाता है।उन्होंने आगे कहा कि यदि हम परमात्मा को अपने हृदय में स्थान देंगे, तो हमारे भीतर से घृणा समाप्त होकर प्रेम और करुणा का जन्म होगा। हर व्यक्ति को कमल की भांति खिलना चाहिए, चाहे जीवन परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि भक्त को भौतिक जिम्मेदारियों के बीच भी प्रभु को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि संत-महात्माओं ने सदैव यही सिखाया है कि आत्मिक अनुभव ही जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि है।कार्यक्रम का समापन मानवता, सेवा और ‘सरबत के भले’ की भावना के संकल्प के साथ किया गया। सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरणा प्राप्त की।

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