आज श्रावण मास की पूर्णिमा पर बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया पवित्र पर्व ‘रक्षाबंधन’

चंबा, 09 अगस्त मुकेश कुमार (गोल्डी)
भारतीय धर्म-संस्कृति में विशेष स्थान रखने वाला रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को बड़े हर्षोल्लास और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया जाता है। यह पावन पर्व भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के अटूट बंधन का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के मस्तक पर तिलक लगाकर रक्षा सूत्र बांधती हैं, जिसे ‘राखी’ कहा जाता है। रक्षाबंधन न केवल हिन्दू बल्कि जैन समाज में भी समान श्रद्धा से मनाया जाता है।त्योहार की शुरुआत ‘पूजा विधि’ से होती है, जिसमें बहनें सुंदर पूजा थाली सजाती हैं।

इस थाली में तेल का दीपक (दीया), रोली, चावल, मिठाई और राखी प्रमुख रूप से रखी जाती है। बहनें दीपक जलाकर आरती करती हैं, इसे गोलाकार घुमाते हुए अपने भाइयों के समक्ष प्रस्तुत करती हैं और उनके माथे पर रोली का तिलक लगाती हैं। इसके उपरांत भाई की कलाई पर राखी बांधकर वे उसकी समृद्धि, लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।

इस अनुष्ठान के बदले भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं, जो प्रेम और स्नेह का प्रतीक होता है। साथ ही, वे जीवन भर बहन की रक्षा करने और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हैं। यह परंपरा परिवार और समाज में पारस्परिक प्रेम, विश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत करती है।रक्षाबंधन का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की गहराई और आत्मीयता का उत्सव है। इस दिन घरों में उल्लास का वातावरण रहता है, रिश्तों में नई ऊर्जा का संचार होता है और पारिवारिक एकजुटता का सुंदर संदेश समाज को मिलता है।