CITU और हिमाचल किसान सभा का चंबा में संयुक्त प्रदर्शन, श्रम संहिताओं व जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ उठी जोरदार आवाज

CITU और हिमाचल किसान सभा का चंबा में संयुक्त प्रदर्शन, श्रम संहिताओं व जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ उठी जोरदार आवाज

चंबा 26 नवंबर मुकेश कुमार (गोल्डी)

अखिल भारतीय आह्वान पर भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (CITU) और हिमाचल किसान सभा के संयुक्त नेतृत्व में आज जिला मुख्यालय चंबा तथा तीसा में विशाल रैली और धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य श्रम संहिताओं, श्रम शक्ति नीति 2025 और केंद्र सरकार की जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करना रहा। बड़ी संख्या में मजदूरों, किसानों, महिलाओं और युवाओं ने इस रैली में भाग लेकर मजदूर–किसान एकता का प्रदर्शन किया।प्रदर्शन के उपरांत राष्ट्रपति महोदया को संबोधित संयुक्त ज्ञापन जिला उपायुक्त चंबा के माध्यम से प्रेषित किया गया।

प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में CITU जिला महासचिव सुदेश ठाकुर, जिलाध्यक्ष नरेंद्र कुमार, उपाध्यक्ष विपिन शर्मा, आंगनबाड़ी यूनियन अध्यक्षा सरोज देवी, मिड-डे मील यूनियन जिला सचिव सरोज ठाकुर, NHPC के संजय कुमार, अयूब खान, दलीप, लोकी, सुरेंद्र सहित अन्य नेताओं ने सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की।CITU जिलाध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मजदूर-विरोधी चार श्रम संहिताओं को लागू कर मजदूरों को बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि फिक्स्ड टर्म रोजगार और ठेका प्रथा को पूरी वैधता मिल गई है, श्रम कानून उल्लंघन को गैर-आपराधिक बनाकर मालिकों को संरक्षण दिया गया है, जबकि मजदूरों की सामूहिक गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में डाल दिया गया है।सुदेश ठाकुर ने कहा कि मजदूर आंदोलन द्वारा एक सदी में अर्जित अधिकारों को एक ही फैसले से छीना जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि देश की 11 में से 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने इन संहिताओं को “मजदूर वर्ग पर जनसंहारक हमला” करार दिया है।नेताओं ने किसान आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने 2020 में किसानों से किए गए लिखित समझौतों में से एक भी वादा पूरा नहीं किया।

MSP को कानूनी गारंटी न देना, कृषि संकट को अनदेखा करना तथा किसान-विरोधी कानून थोपना सीधा विश्वासघात है।आज के प्रदर्शन में प्रमुख मांगों में सभी फसलों का कानूनी MSP, श्रम संहिताओं की वापसी, 26,000 रुपए राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन, सार्वभौमिक पेंशन, कर्जमाफी, निजीकरण पर रोक, मनरेगा को 200 दिनों के साथ मजबूत करना और महंगाई पर नियंत्रण शामिल रहे।नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मजदूर–किसान की मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले समय में संयुक्त आंदोलन और अधिक व्यापक एवं निर्णायक रूप लेगा। प्रदर्शन में अंजू देवी, मीनाक्षी, मीना, कविता, रेखा, कौशल्या, कमल, विपिन, राकेश, चमन समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

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