एम्बुलेंस कर्मचारियों की मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल, चम्बा में भी जोरदार प्रदर्शन

एम्बुलेंस कर्मचारियों की मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल, चम्बा में भी जोरदार प्रदर्शन

चम्बा, 3 अक्तूबर मुकेश कुमार (गोल्डी)


हिमाचल प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी यूनियन ने अपनी लम्बित मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की। इस कड़ी में चम्बा जिला मुख्यालय में भी यूनियन के सदस्य एकजुट होकर उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे और नारेबाजी करते हुए कंपनी व स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर रोष प्रकट किया।

धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार ने की, जबकि जिला महासचिव सुदेश ठाकुर, सीटू उपाध्यक्ष विपिन शर्मा, यूनियन सचिव अमित कुमार सहित धीरज कुमार, याकूब, रिशु और पूजा आदि ने कर्मचारियों को संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि मेडसवान कंपनी पूरी तरह तानाशाही रवैया अपना रही है।

कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा, जबकि प्रदेश उच्च न्यायालय ने वर्ष 2020 में न्यूनतम वेतन लागू करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। अदालत के निर्णय की अवहेलना की जा रही है और श्रम विभाग भी कंपनी व विभाग पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर रहा है।

यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि कुशल कर्मचारियों को अकुशल श्रेणी का वेतन दिया जा रहा है, ओवरटाइम का भुगतान नियमों के विपरीत किया जा रहा है और कर्मचारियों को बिना कारण मुख्यालय बुलाकर प्रताड़ित किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और कंपनी ने जल्द ही उनकी जायज मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो यूनियन प्रदेशव्यापी आंदोलन को लंबा खींचने के लिए तैयार है, जिसका सीधा खामियाजा सरकार और कंपनी को भुगतना पड़ेगा।

यूनियन की मुख्य मांगों में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय व श्रम विभाग के आदेशानुसार न्यूनतम वेतन लागू करना, 12 घंटे कार्य करने पर दुगना ओवरटाइम भुगतान, भविष्य निधि एवं ईएसआई में हो रही त्रुटियों को दुरुस्त करना, वेतन स्लिप जारी करना, कर्मचारियों को प्रतिवर्ष 10% वेतन वृद्धि देना, पिछली कंपनी द्वारा बकाया ग्रेच्युटी व एरियर का तत्काल भुगतान और एम्बुलेंस की समय-समय पर उच्च स्तरीय ऑडिटिंग व मेंटेनेंस शामिल हैं।

आज हुए इस प्रदर्शन में रोहित ठाकुर, राकेश कुमार, देवराज, तिलकराज, पंकज कुमार, दीवान, जतिन, अंजना, कामिनी, सुरेश, पम्मी, संजीव और मनोज सहित यूनियन के सभी सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

यूनियन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ करना सरकार और कंपनी दोनों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। यदि मांगें पूरी नहीं होतीं तो यह आंदोलन आने वाले समय में और व्यापक रूप लेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!