अगर जीएसटी 2.0 राहत है, तो क्या जीएसटी 1.0 लूट था ? जवाब दे केंद्र सरकार :– मनीष सरीन

डलहौज़ी/चम्बा, 26 सितम्बर मुकेश कुमार (गोल्डी)
कांग्रेस कार्यकर्ता मनीष सरीन ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए जीएसटी 2.0 को लेकर भाजपा नेताओं के जश्न और प्रचार अभियान पर कड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि नई व्यवस्था वास्तव में राहत देने वाली है, तो फिर पिछले आठ वर्षों तक लागू जीएसटी 1.0 को जनता पर बोझ क्यों बनाया गया?सरीन ने कहा कि भाजपा नेता आज घर-घर जाकर जीएसटी 2.0 को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। लेकिन जनता का सवाल है कि यदि यह नया ढांचा सही और सरल है, तो क्या पुराना गलत था? आठ वर्षों तक व्यापारियों और आम परिवारों को उलझी हुई कर व्यवस्था में क्यों फँसाया गया? क्या यह स्वीकार नहीं है कि जीएसटी 1.0 असफल और बोझिल था?उन्होंने बताया कि कांगड़ा–चंबा संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज को भी चंबा के सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जीएसटी 2.0 का बचाव करना पड़ा।

“यदि सुधार वास्तव में जनता को राहत पहुँचा रहे होते, तो जनता खुद इसका अनुभव करती। लेकिन बार-बार प्रेस कॉन्फ्रेंस और प्रचार की ज़रूरत ही यह साबित करती है कि जीएसटी 1.0 गलत था,” सरीन ने कहा।ज्ञात हो कि वर्ष 2017 में लागू जीएसटी 1.0 में पाँच स्लैब (0%, 5%, 12%, 18% और 28% + उपकर) थे, जो छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए जटिल साबित हुए। इसके विपरीत, जीएसटी 2.0 में कर ढाँचा सरल करते हुए स्लैब घटाकर 5% और 18% किया गया है तथा 40% का नया लग्ज़री/पाप वस्तु स्लैब जोड़ा गया है। साथ ही सीमेंट, दोपहिया वाहन, छोटी कारें और कई उपभोक्ता वस्तुएँ 28% से घटाकर 18% श्रेणी में लाई गई हैं। जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर भी छूट दी गई है।सरीन ने भाजपा से सवाल किया कि आठ साल तक महँगाई और व्यापारियों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा? सुधार का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा को जश्न मनाने की बजाय जनता से माफ़ी माँगनी चाहिए।इस अवसर पर उनके साथ राजेश चोभियाल, इच्छा राम टंडन, रजत शर्मा, योगराज महाजन, विशाल सिंह, विकास सिंह और विकास धीमान मौजूद रहे।