सेब के पौधों में मार्सोनिना ब्लॉच की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक विधियों को अपनाएं:- कृषि विज्ञान केंद्र चंबा

सेब के पौधों में मार्सोनिना ब्लॉच की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक विधियों को अपनाएं:- कृषि विज्ञान केंद्र चंबा

चंबा, 28 जुलाई मुकेश कुमार (गोल्डी)

मानसून के दौरान सेब के बागानों में फफूंद जनित रोग मार्सोनिना ब्लॉच का खतरा तेजी से बढ़ जाता है, जो पत्तियों के असमय झड़ने और फलों की गुणवत्ता में गिरावट का प्रमुख कारण बनता है। ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र चंबा के वैज्ञानिकों ने सेब बागवानों के लिए एक विस्तृत और वैज्ञानिक परामर्श जारी किया है।केंद्र के प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र कुमार तथा पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. जया चौधरी ने बताया कि इस रोग की रोकथाम के लिए बागवानों को तुरंत प्रभावी प्रबंधन अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नियमित छंटाई और पौधों के आसपास की साफ-सफाई से बगीचे में वायु संचार बेहतर बना रहता है, जिससे रोग के फैलाव को रोका जा सकता है।

उन्होंने बताया कि रासायनिक नियंत्रण के तहत विभिन्न चरणों पर विशेष प्रकार की दवाइयों का छिड़काव करना आवश्यक है:

अखरोट के आकार के फल अवस्था में:-

फ्लक्सापायरोक्सैड 250 ग्राम/लीटर + पाइराक्लोस्ट्रोबिन 250 ग्राम/लीटर (500 SC) – 50 मिली प्रति 200 लीटर पानीफ्लुओपाइराम 17.7% + टेबुकोनाज़ोल 17.7% SC – 126 मिली प्रति 200 लीटर पानीडोडिन 40% – 150 मिली प्रति 200 लीटर

पानीफल विकास की अवस्था में:-

टेबुकोनाज़ोल 50% + ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन 25% – 80 ग्राम प्रति 200 लीटर पानीमैन्कोज़ेब 60% + पाइराक्लोस्ट्रोबिन 5% – 700 ग्राम प्रति 200 लीटर पानीमेटिराम 70% – 600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी

फल तुड़ाई से 20–25 दिन पूर्व:-

ज़िराम 80% – 500 मिली प्रति 200 लीटर पानीवैज्ञानिकों ने बागवानों से अनुरोध किया है कि वे इन दवाओं के प्रयोग में अनुशंसित मात्रा और समय का विशेष ध्यान रखें, ताकि रोग नियंत्रण के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता भी बनी रहे।

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