बनीखेत में संत निरंकारी सत्संग, मानवता और एकत्व का दिया गया संदेश

डलहौजी/चम्बा 18 मुकेश कुमार (गोल्डी)
बनीखेत स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में महात्मा सुभाष टंडन ज ने साध संगत को संबोधित करते हुए परमात्मा की पहचान, मानवता और सेवा भाव पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परमात्मा को जानने के पश्चात ही मनुष्य अपने मूल स्वरूप को पहचान पाता है और यह अनुभव होता है कि हम सभी आत्मिक रूप से उसी परमात्मा के अंश हैं। एक परमात्मा का बोध होते ही जीवन में एकत्व की भावना स्वतः साकार हो जाती है।महात्मा टंडन जी ने कहा कि जब परमात्मा के वास्तविक स्वरूप को जानकर प्रेम भावना से भक्ति की जाती है, तो वही प्रेमा-भक्ति कहलाती है। प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा का वास है और हर कोई श्रेष्ठ है—यदि इस भाव से जीवन जिया जाए तो समाज से भेदभाव स्वतः समाप्त हो सकता है।

उन्होंने निःस्वार्थ सेवा, आपसी सहयोग और सरबत के भले की भावना को ही सच्ची मानवता बताया।उन्होंने आगे कहा कि संत का हृदय सभी के लिए समान रूप से करुणा से भरा होता है, जहां अपने-पराए का भेद नहीं रहता। केवल शारीरिक रूप से इंसान होना पर्याप्त नहीं, बल्कि मानव मात्र के प्रति व्यवहार में भी मानवता झलकनी चाहिए।इस अवसर पर वंदना जी ने कहा कि जब हम परमात्मा को अपने हृदय में स्थान देते हैं, तभी मानवता के प्रति सच्चा प्रेम उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि हर इंसान को कीचड़ में खिलने वाले कमल की तरह विपरीत परिस्थितियों में भी अपने जीवन को निखारना चाहिए।

महात्मा टंडन ज ने कहा कि प्रभु-परमात्मा का सहारा लेकर मानवीय गुणों का विस्तार करना चाहिए और ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर भक्ति का आनंद लेना चाहिए। संत-महात्मा सदैव सेवा, समर्पण और मानवता की भावना के साथ संपूर्ण समाज के कल्याण के लिए कार्य करते हैं। कार्यक्रम में शाखा प्रबंधक महात्मा श्री एच. गुलेरिया जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।