रंजीत सागर डैम में मछली कारोबार के टेंडर को लेकर विवाद, पारदर्शिता पर उठे सवाल

रंजीत सागर डैम में मछली कारोबार के टेंडर को लेकर विवाद, पारदर्शिता पर उठे सवाल

डलहौजी/ चम्बा 17 मार्च मुकेश कुमार (गोल्डी)

जिला चंबा के चुहण (संधारा) क्षेत्र में स्थित रंजीत सागर डैम में मछलियों के कारोबार के टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि संधारा कोपरेटिव सोसायटी अधिकतम बोली लगाने वाले ठेकेदार को टेंडर देने के बजाय पुराने ठेकेदार को कम रेट पर ठेका देने की तैयारी कर रही है, जिससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।जानकारी के अनुसार सोसायटी ने मछलियों के कारोबार के लिए तीन बार खुले टेंडर आमंत्रित किए और दूर-दूर से ठेकेदारों को बोली लगाने के लिए बुलाया गया। हालांकि कुछ ठेकेदारों का आरोप है कि सोसायटी ने बोली प्रक्रिया को समय पर पूरा नहीं किया और अब तक टेंडर फाइनल नहीं किया गया है।ठेकेदारों का कहना है कि यदि कम दर पर टेंडर दिया जाता है तो मत्स्य विभाग को मिलने वाली 7.5 प्रतिशत रॉयल्टी में भी कमी आएगी, जिससे सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है।

मंडी जिले के ठेकेदार आफताब मोहम्मद का कहना है कि वह सोसायटी से 110 रुपये प्रति किलो की दर से मछली खरीदने को तैयार हैं। उनके अनुसार रंजीत सागर डैम के हिमाचल प्रदेश वाले हिस्से से लगभग 85 मीट्रिक टन मछलियों का कारोबार संभव है।गौरतलब है कि रंजीत सागर डैम का क्षेत्र हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर तीन राज्यों में फैला हुआ है। इसका हिमाचल प्रदेश वाला हिस्सा जिला चंबा के बनीखेत क्षेत्र में आता है, जहां संधारा कोपरेटिव सोसायटी के माध्यम से मछलियों का कारोबार संचालित किया जाता है।इस मामले पर मत्स्य विभाग के निदेशक विवेक चंदेल ने कहा कि उन्हें इस विवाद की जानकारी हाल ही में मिली है। उन्होंने बताया कि मछलियों के कारोबार का संचालन सोसायटी द्वारा किया जाता है और विभाग को इससे 7.5 प्रतिशत रॉयल्टी प्राप्त होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टेंडर उसी ठेकेदार को दिया जाना चाहिए जो सबसे अधिक बोली लगाए। यदि ऐसा नहीं किया जाता और इससे विभाग को नुकसान होता है, तो सोसायटी का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।विभाग ने दोनों पक्षों की बैठक बुलाकर जल्द समाधान निकालने और टेंडर प्रक्रिया पूरी करने की बात कही है।

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