सलूणी साहित्य सम्मेलन–2026 का भव्य आगाज, हिंदी के वैश्विक स्वरूप पर मंथन

सलूणी साहित्य सम्मेलन–2026 का भव्य आगाज, हिंदी के वैश्विक स्वरूप पर मंथन

सलूणी/ चम्बा 18 मार्च मुकेश कुमार (गोल्डी)

आईसीएसएसआर-एनडब्ल्यूआरसी प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “Hindi as Voice and Vision: Navigating Identity, History, and Postcolonial Shifts” के अंतर्गत “सलूणी साहित्य सम्मेलन–2026” का आज भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन महाविद्यालय के ग्रामीण क्षेत्र में 20 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है, जो संस्थान की शैक्षणिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। सम्मेलन का प्रथम दिवस उत्साह और शैक्षणिक ऊर्जा के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई। उद्घाटन सत्र में सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. शिव दयाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि मुख्य वक्ता डॉ. बृजेंद्र कुमार अग्निहोत्री ने हिंदी भाषा की समकालीन भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

संगोष्ठी की संयोजक श्रीमती पिंकी देवी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की, वहीं आयोजन सचिव डॉ. सौरभ मिश्रा ने सम्मेलन के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मोहिंदर कुमार सलारिया ने अपने संबोधन में संस्थान की 20 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद महाविद्यालय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर क्षेत्र के विद्यार्थियों को सशक्त बनाया है। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा देश की सांस्कृतिक पहचान का आधार है और ऐसे आयोजन बौद्धिक संवाद को नई दिशा देते हैं।मुख्य वक्ता डॉ. अग्निहोत्री ने हिंदी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान परिदृश्य में उसकी प्रासंगिकता पर गहन विचार व्यक्त किए, जबकि मुख्य अतिथि डॉ. शिव दयाल ने हिंदी के सामाजिक और शैक्षणिक महत्व को रेखांकित किया।

दोपहर बाद आयोजित तकनीकी सत्रों में देशभर से आए शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। प्रथम दिवस का समापन रंगारंग सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ, जिसने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिए।

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