पांगी घाटी में हिमालयन थार का दीदार, समृद्ध जैव विविधता का जीवंत प्रमाण

पांगी घाटी में हिमालयन थार का दीदार, समृद्ध जैव विविधता का जीवंत प्रमाण

चम्बा 03 फरवरी मुकेश कुमार (गोल्डी)

हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले की सुदूर और दुर्गम पांगी घाटी एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता के चलते सुर्खियों में है। हाल ही में क्षेत्र में हुई भारी बर्फबारी के बाद घाटी के ऊंचे पहाड़ी ढलानों पर हिमालयन थार का एक बड़ा झुंड विचरण करता हुआ देखा गया है। यह दुर्लभ दृश्य न केवल स्थानीय लोगों बल्कि वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए भी खासा आकर्षण का विषय बना हुआ है।हिमालयन थार सामान्यतः अत्यंत ऊंचे, पथरीले और दुर्गम इलाकों में रहना पसंद करते हैं, जहां मानवीय गतिविधियां न्यूनतम होती हैं। लेकिन जब भारी बर्फबारी के कारण ऊपरी क्षेत्रों में घास और अन्य प्राकृतिक भोजन ढक जाता है, तो ये वन्यजीव भोजन की तलाश में निचले और खुले ढलानों की ओर उतर आते हैं।

इसी कारण इस बार पांगी घाटी में इनके दर्शन अपेक्षाकृत अधिक संख्या में हुए हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि पांगी जैसे दुर्गम क्षेत्र में हिमालयन थार का इतने बड़े झुंड में दिखना एक सकारात्मक संकेत है। यह इस बात की पुष्टि करता है कि इस क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित और स्वस्थ बना हुआ है। वन विभाग तथा स्थानीय समुदायों द्वारा वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों का असर अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है।इस संदर्भ में डीएफओ वाइल्डलाइफ चम्बा कुलदीप जमवाल ने बताया कि पांगी घाटी में हिमालयन थार की मौजूदगी इस क्षेत्र की संतुलित खाद्य श्रृंखला का प्रतीक है।

उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि हिमालयन थार एक मजबूत और गठीले शरीर वाला जंगली जीव है, जो मुख्य रूप से मध्य हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाया जाता है और कठिन परिस्थितियों में भी सहजता से जीवन यापन कर लेता है।डीएफओ ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे इन वन्यजीवों को दूर से ही देखें और किसी भी प्रकार से उन्हें परेशान न करें। उनके प्राकृतिक आवास में शांति बनाए रखना और अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना ही हिमालयन थार जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण की सबसे प्रभावी कुंजी है।

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