हिमाचल में एससी–एसटी विकास निधि कानून बनाने की उठी मांग

हिमाचल में एससी–एसटी विकास निधि कानून बनाने की उठी मांग

बिलासपुर 27 नवंबर चंबा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)

संविधान दिवस पर बिलासपुर में राज्य स्तरीय परामर्श, राजनीतिक दलों व संगठनों ने रखी एक स्वर में मांगसंविधान दिवस के अवसर पर किसान भवन बिलासपुर में हिमाचल प्रदेश में एससी–एसटी विकास निधि कानून बनाने को लेकर एक राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कांग्रेस, सीपीएम, बहुजन समाज पार्टी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी उपस्थित प्रतिभागियों ने राज्य सरकार से चुनाव घोषणा पत्र में किए गए वायदे के अनुरूप इस कानून को शीघ्र लागू करने की मांग की।

परामर्श के दौरान संविधान के नीति निदेशक सिद्धांतों में शामिल अनुच्छेद 46 तथा छठी पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत शुरू की गई एससी–एसटी उपयोजना की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने बताया कि उपयोजना के तहत राज्यों को अपनी कुल योजना का उतना प्रतिशत बजट आवंटित करना चाहिए, जितनी राज्य में अनुसूचित जाति व जनजाति की जनसंख्या है। यह निधि केवल शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक विकास पर खर्च की जानी चाहिए तथा इसे न तो अन्य मदों में डाइवर्ट किया जा सकता है और न ही लैप्स होती है।

परामर्श के दौरान दावा किया गया कि हिमाचल प्रदेश में यह बजट घटकर मात्र 0.4 प्रतिशत रह गया है, जो गंभीर चिंता का विषय है।कार्यक्रम में कांग्रेस के पूर्व विधायक एवं राज्य उपाध्यक्ष डॉ. वीरू राम किशोर, सीपीएम के जिला सचिव लखनपाल शर्मा, बसपा के राज्य सचिव वीरेंद्र कुमार और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिवालय सदस्य अधिवक्ता प्रवेश चंदेल सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि 2017 से उठ रही इस मांग को कानूनी रूप देकर ही एससी–एसटी समुदायों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है।

कार्यक्रम में प्रो. केएस धीर, पूर्व आईएफएस अधिकारी डीपी चंद्रा, सेवानिवृत्त एचएएस अधिकारी बीआर कमल, मनरेगा वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष चैन सिंह सुमन सहित कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने मिलकर सरकार से शीघ्र अधिनियम लाने की अपील की।

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