आध्यात्मिक ज्ञान को जीवन में उतारना ही सच्ची भक्ति है :- महात्मा अनूप मिन्हास

बनीखेत/चंबा 01 नवंबर चम्बा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)
संत निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में रविवार को आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन महात्मा अनूप मिन्हास जी की अध्यक्षता में किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सत्संग में भाग लिया और भजन, प्रवचनों तथा आध्यात्मिक विचारों के माध्यम से परमात्मा की महिमा का गुणगान किया।सत्संग के दौरान महात्मा अनूप मिन्हास जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि केवल आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को अपने जीवन में अपनाना और उसके अनुरूप आचरण करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ज्ञान लेकर यदि उसका उपयोग जीवन में नहीं किया जाता, तो न तो उससे कोई वास्तविक लाभ मिलता है और न ही आनंद की अनुभूति होती है।उन्होंने इस संदेश को इन पंक्तियों के माध्यम से समझाया—ज्ञान लेकर ज्ञान का है जिसने न उपयोग किया।उसको लाभ मिला न कोई, न उसने आनंद लिया।महात्मा ने कहा कि वास्तविक आध्यात्मिक जागृति केवल विचारों और दिखावे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हमारे व्यवहार, आचरण और सामाजिक दायित्वों में भी दिखाई देनी चाहिए।

जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, परमात्मा की रजा को स्वीकार करते हुए प्रत्येक पल को प्रसाद समझकर प्रसन्नता, संतोष और कृतज्ञता के साथ जीना ही सच्ची आध्यात्मिकता है।उन्होंने आगे कहा कि केवल ज्ञान प्राप्त करने से जीवन नहीं संवरता, बल्कि ज्ञान के अनुरूप कर्म करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के कण-कण में परमात्मा की मौजूदगी का एहसास होता है। मनुष्य भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए दिन-रात दौड़ता रहता है, लेकिन वास्तविक आनंद से दूर रह जाता है। वहीं संत-महापुरुष अपने प्रत्येक कार्य में परमात्मा को शामिल करते हैं। अहंकार से मुक्त रहना, विनम्रता अपनाना और परोपकार की भावना बनाए रखना ही उनके आनंदमय जीवन का आधार है।इस अवसर पर संयोजक महात्मा एच.एस. गुलेरिया जी सहित उपस्थित संगत ने भजनों और कविताओं के माध्यम से परमात्मा की सर्वव्यापकता का गुणगान किया।
