देशी बीज एवं फसल जर्मप्लाज्म संरक्षण के लिए चंबा के किसानों को मिला सम्मान

चम्बा 20 जनवरी मुकेश कुमार (गोल्डी)
कृषि विज्ञान केंद्र चंबा के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन) में हाल ही में पौधा संरक्षण एवं कृषक अधिकार अधिनियम (PPV & FR Act) के अंतर्गत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में देशी बीजों और पारंपरिक फसल प्रजातियों के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए चंबा जिला के दो प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया।उन्होंने बताया कि विकासखंड सलूणी के गांव तिवारी निवासी किसान पवन कुमार तथा चंबा विकासखंड के अंतर्गत गांव बगोली निवासी अनिल कुमार को देशी अनाज एवं फसल जर्मप्लाज्म के संरक्षण एवं गुणन के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल द्वारा सम्मान प्रदान किया गया।

यह सम्मान किसानों द्वारा स्थानीय फसल प्रजातियों को सहेजने और उन्हें आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना के रूप में दिया गया।कार्यशाला के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में किसानों ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय फसल विविधता को प्रदर्शित करने के लिए देशी बीजों को प्रस्तुत किया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के संदर्भ में पारंपरिक बीजों एवं स्थानीय फसल प्रजातियों के संरक्षण के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही किसानों को यह भी बताया गया कि देशी बीज न केवल पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, बल्कि कम लागत में बेहतर उत्पादन देने में भी सहायक होते हैं।डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र चंबा की ओर से वैज्ञानिक डॉ. जया एवं डॉ. नेहा ने भी किसानों के साथ इस कार्यशाला में भाग लिया और तकनीकी जानकारियां साझा कीं।

उन्होंने आगे बताया कि संरक्षित जर्मप्लाज्म से संबंधित बीजों को शीघ्र ही पीपीवी एवं एफआर अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत किया जाएगा, जिससे किसानों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ इन बीजों का दीर्घकालिक संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।