कृषि और पर्यटन को जोड़कर चंबा में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल

चंबा 25 अगस्त मुकेश कुमार (गोल्डी)
चंबा में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ अब कृषि और ग्रामीण पर्यटन को भी इससे जोड़ने की कवायद शुरू हो गई है। ‘चलो चंबा’ अभियान के तहत ऐतिहासिक भूरी सिंह संग्रहालय में प्राकृतिकी कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे 150 से अधिक किसानों और होम स्टे संचालकों ने भाग लिया। कार्यशाला में पारंपरिक बीजों के संरक्षण, जैविक खेती, जलवायु परिवर्तन और कृषि को पर्यटन से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने पर मंथन किया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि चंबा की पारंपरिक कृषि, स्थानीय बीज, जैविक उत्पाद और समृद्ध जैव विविधता पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। स्थानीय उत्पादों को होम स्टे और ग्रामीण पर्यटन से जोड़कर किसानों, युवाओं और स्थानीय लोगों के लिए आय के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने को लेकर भी विशेष पहल की गई। अभियान के तहत प्रत्येक होम स्टे संचालक को कम से कम 10 फलदार और औषधीय पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटकों को स्थानीय जैव विविधता से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।

नॉट ऑन मैप के विशेषज्ञ डॉ. अरुण भाटिया, पहाड़ ट्रस्ट के अनूप कुमार और एमथ्रीएम फाउंडेशन के आशीष ने प्रतिभागियों को पारंपरिक बीज संरक्षण, जैविक कृषि और ग्रामीण पर्यटन के बीच बेहतर तालमेल बनाने के व्यवहारिक गुर दिए। विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच स्थानीय बीजों और जैव विविधता के संरक्षण को भविष्य के लिए आवश्यक बताया।कार्यशाला के बाद प्रतिभागियों को सिल्लाघ्राट, बरौर, जुम्महार और पनेला क्षेत्रों का एक्सपोजर विजिट भी करवाया गया। दवाट वैली, साल वैली, खजियार, कालाटोप, तलाई, जुम्महार, पनेला और सिल्लाघ्राट से पहुंचे प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को समझा।

अधिकारियों के अनुसार पारंपरिक कृषि, जैविक उत्पाद और जिम्मेदार होम स्टे प्रबंधन को एक मंच पर लाकर चंबा में ग्रामीण पर्यटन का मजबूत मॉडल तैयार किया जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर स्थायी स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ चंबा की पारंपरिक कृषि और जैव विविधता को नई पहचान मिलेगी।