जम्मू-कश्मीर से चंबा पहुंचा आस्था का कारवां, चौगान में गूंज रहे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे

जम्मू-कश्मीर से चंबा पहुंचा आस्था का कारवां, चौगान में गूंज रहे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे

चंबा 03 सितंबर मुकेश कुमार (गोल्डी)

चंबा 03 सितंबर मुकेश कुमार (गोल्डी)

कंधों पर पवित्र देव चिन्ह, जुबां पर भोलेनाथ का नाम और आंखों में मणिमहेश कैलाश के दर्शन की आस लिए जम्मू-कश्मीर से श्रद्धालुओं का आस्था का कारवां चंबा पहुंच गया है। कई दिनों की पैदल यात्रा पूरी करने के बाद श्रद्धालु ऐतिहासिक चौगान मैदान में पड़ाव डाल रहे हैं। यहां पहुंचते ही वातावरण ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से भक्तिमय हो गया है।जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु पारंपरिक रूप से पैदल यात्रा करते हुए चंबा पहुंचते हैं। चौगान मैदान में विश्राम के दौरान श्रद्धालु अपने पवित्र देव चिन्ह स्थापित करते हैं और पूजा-अर्चना करने के बाद मणिमहेश कैलाश की ओर आगे बढ़ते हैं।

श्रद्धालुओं के लिए चौगान महज एक पड़ाव नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।मान्यता है कि भगवान शिव कैलाश की ओर जाते समय चंबा के ऐतिहासिक चौगान में विश्राम के लिए रुके थे। इसी धार्मिक मान्यता के चलते मणिमहेश यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए चौगान का विशेष महत्व है।इस वर्ष 4 सितंबर को जन्माष्टमी के अवसर पर मणिमहेश में छोटा स्नान होगा, जबकि 19 सितंबर को शाही स्नान आयोजित किया जाएगा। इन पवित्र अवसरों पर हजारों श्रद्धालुओं के मणिमहेश डल झील में आस्था की डुबकी लगाने की उम्मीद है।श्रद्धालुओं के लिए मणिमहेश यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और परंपरा का प्रतीक है।

परिवार के बुजुर्गों के साथ यात्रा करने वाली नई पीढ़ी भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। कई श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों की खुशहाली की मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर मणिमहेश में बच्चों का मुंडन संस्कार करवाने की भी परंपरा है।जम्मू-कश्मीर से चंबा पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण चौगान से लेकर मणिमहेश मार्ग तक धार्मिक माहौल बना हुआ है। हर ओर भोलेनाथ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं और श्रद्धालु उत्साह के साथ कैलाश दर्शन की ओर बढ़ रहे हैं।च

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