बिजली बोर्ड में फर्जी प्रमाणपत्रों से नौकरी हासिल करने का मामला, पूर्व जेई समेत तीन पर विजिलेंस ने दर्ज किया केस

बिजली बोर्ड में फर्जी प्रमाणपत्रों से नौकरी हासिल करने का मामला, पूर्व जेई समेत तीन पर विजिलेंस ने दर्ज किया केस

कर्नाटक, राजस्थान और एनआईओएस ने प्रमाणपत्र जारी करने से किया इनकार, बोर्ड के कुछ अधिकारी भी जांच के दायरे में

चंबा 06 नवम्बर चंबा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)

हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड में फर्जी शैक्षणिक और तकनीकी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने का गंभीर मामला सामने आया है। मामले में विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व कनिष्ठ अभियंता (जेई) समेत तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। प्रारंभिक जांच में तीनों आरोपियों के शैक्षणिक एवं तकनीकी प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए हैं। संबंधित शिक्षण संस्थानों ने सत्यापन के दौरान इन प्रमाणपत्रों को जारी करने से इनकार किया है।विजिलेंस थाना चंबा में दर्ज मामले के अनुसार, खणी निवासी अनिल कुमार वर्ष 2022 में बिजली बोर्ड के होली उपमंडल में कनिष्ठ अभियंता के पद पर नियुक्त हुए थे। आरोप है कि नियुक्ति के दौरान उन्होंने कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा प्रस्तुत किया था। विजिलेंस की ओर से करवाए गए सत्यापन में संबंधित विश्वविद्यालय ने अनिल कुमार के नाम पर ऐसा कोई डिप्लोमा जारी किए जाने से इनकार कर दिया।जांच के दौरान अन्य आरोपियों के प्रमाणपत्रों पर भी सवाल उठे हैं।

कर्नाटक, राजस्थान और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) से करवाए गए सत्यापन में प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हो सकी। इसके बाद विजिलेंस ने तीनों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है।

बोर्ड के अधिकारी भी जांच के दायरे में

मामले में एक और अहम पहलू सामने आया है। जांच एजेंसी के अनुसार, प्रमाणपत्रों की संदिग्धता की जानकारी होने के बावजूद बिजली बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर आपराधिक कार्रवाई के लिए जांच एजेंसी को सूचित नहीं किया। ऐसे अधिकारियों की भूमिका भी अब विजिलेंस की जांच के दायरे में है।उधर, प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल उठने के बाद बिजली बोर्ड प्रबंधन ने विभागीय कार्रवाई करते हुए अनिल कुमार और विशाल कुमार चौहान को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था, जबकि दिवेश कुमार का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया था। विजिलेंस अब इस पूरे मामले में फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल, नियुक्ति प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहनता से जांच कर रही है।

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