संत निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में आत्ममंथन और व्यवहारिक जीवन पर दिया गया संदेश

डलहोजी/चम्बा 04 अक्टूबर चंबा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)
स्थानीय संत निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंची संगत ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। सत्संग के दौरान सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं राजपिता जी के विचारों को एलईडी स्क्रीन के माध्यम से श्रवण किया गया।सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने विचारों में कहा कि केवल सत्संग में आकर कुछ घंटे बिताना और फिर वापस चले जाना ही भक्ति नहीं है। वास्तविक भक्ति का अर्थ है कि ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने के बाद व्यक्ति अपने जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव ला पाया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या उसके भीतर अपना-पराया, वैर, ईर्ष्या, द्वेष और नफरत जैसी भावनाएं समाप्त हुई हैं या नहीं।उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य ने निरंकार प्रभु को जाना है तो उसके जीवन में विशालता, नम्रता, प्रेम और सहनशीलता जैसे गुण दिखाई देने चाहिए।

भक्त का जीवन केवल किताबी बातों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके व्यवहार और आचरण में भी भक्ति दिखाई देनी चाहिए। प्रत्येक भक्त को हर पल और हर क्षण आत्ममंथन करते रहना चाहिए कि वह वास्तव में भक्त वाला जीवन जी रहा है या नहीं।सतगुरु माता जी ने यह भी कहा कि निरंकार प्रभु को केवल अपनी जरूरत के समय याद करने के बजाय हर समय मन में बसाए रखना चाहिए। व्यक्ति को अपने विचारों और व्यवहार का निरंतर निरीक्षण करते हुए आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।सत्संग के दौरान संगत ने भजन एवं विचारों के माध्यम से कण-कण में व्याप्त निरंकार प्रभु का गुणगान किया। इस अवसर पर टप्पर, चौहड़ा, बाथरी, गोली, डलहौजी और बगडार सहित विभिन्न क्षेत्रों से आई संगत ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।शाखा प्रबंधक महात्मा एच. गुलेरिया ने कहा कि सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ब्रह्मज्ञान प्रदान कर मानव समाज को सुखी जीवन की राह दिखा रही हैं। उन्होंने संगत से आह्वान किया कि सतगुरु के वचनों को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने व्यवहारिक जीवन में अपनाकर मानव जीवन को सफल और सार्थक बनाएं।
