सुरक्षित बचपन अभियान के प्रथम चरण का समापन, चम्बा में चार स्थानों पर लगाए जागरूकता शिविर
चम्बा 31 अक्टूबर चंबा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) चम्बा की ओर से बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे सप्ताहव्यापी गहन जागरूकता अभियान ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के प्रथम चरण का शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को समापन हो गया। अभियान के अंतिम दिन जिले के चार शिक्षण संस्थानों में जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। इनमें राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला करियां, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मेहला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला तीसा तथा गुरु नानक पब्लिक स्कूल डलहौजी शामिल रहे।राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला करियां और मेहला में आयोजित शिविरों का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चम्बा के सचिव एकांश कपिल ने किया।

वहीं, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला तीसा में सिविल जज-कम-ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी तीसा सुमित ठाकुर तथा गुरु नानक पब्लिक स्कूल डलहौजी में सिविल जज-कम-ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी डलहौजी मेघा शर्मा ने विद्यार्थियों को जागरूक किया।शिविरों में विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, बाल संरक्षण और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act), 2012 के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार शोषण की पहचान की जा सकती है और ऐसी परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा के लिए कौन से कदम उठाने चाहिए। साथ ही किसी भी अप्रिय घटना की जानकारी बिना देरी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, साइबर अपराधों से बचाव तथा डिजिटल माध्यमों पर सतर्क रहने के बारे में भी जागरूक किया गया। उन्हें चाइल्ड हेल्पलाइन, शिकायत दर्ज करवाने की प्रक्रिया, निःशुल्क विधिक सहायता और बच्चों के लिए उपलब्ध बाल-अनुकूल कानूनी सेवाओं की जानकारी दी गई।इस दौरान अभिभावकों, शिक्षकों और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा गया कि बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध करवाना सभी का दायित्व है।यह अभियान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (HPSLSA) के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना तथा बाल शोषण की रोकथाम के लिए समाज में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित करना है।