होबार स्कूल में प्राकृतिक संसाधनों से इको-क्राफ्टिंग पर कार्यशाला आयोजित, 120 विद्यार्थियों ने लिया भाग

चुवाड़ी/ चम्बा 30 अक्टूबर चंबा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला होबार में पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम 2026-27 के अंतर्गत मिशन LiFE (लाइफ) परियोजनाओं के तहत प्राकृतिक संसाधनों से इको-क्राफ्टिंग विषय पर एक दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के प्रायोजन से आयोजित इस कार्यशाला में शिक्षकों एवं युवाओं सहित 30 प्रतिभागियों और 120 विद्यार्थियों ने भाग लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रवीण कुमार सिंह ने किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और पारंपरिक ज्ञान को सहेजने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और रचनात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

कार्यशाला के दो सत्रों में विषय विशेषज्ञ डॉ. रूप लाल ने व्याख्यान एवं व्यावहारिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मिशन LiFE की विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने मृदा एवं अपशिष्ट प्रबंधन, जल और ऊर्जा संरक्षण, खाद्य संसाधनों के बेहतर उपयोग, जैव विविधता संरक्षण, पक्षियों के लिए घोंसले बनाने तथा इको-क्राफ्टिंग जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों का चयन स्थानीय समस्याओं और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।इस दौरान स्थानीय हस्तकला विशेषज्ञ सावित्री देवी, करतार देवी और गुस्तो देवी ने पारंपरिक हस्तकला का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।

उन्होंने धमन वृक्ष से रस्सी, बांस से टोकरी, खजूर के पत्तों से चटाई व झाड़ू, पोचल से बिन्ना तथा धान की पराली से टोकरी बनाने की विधियां सिखाईं। विद्यार्थियों की ओर से तैयार की गई रचनात्मक वस्तुओं की भी सराहना की गई।विद्यालय की ईको क्लब प्रभारी संगीता ने कार्यशाला का संचालन एवं समन्वय किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों के संरक्षण, पुनः उपयोग और रचनात्मक इस्तेमाल से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाया जा सकता है।कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को जलपान एवं पुरस्कार वितरित किए गए। कार्यशाला ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा स्थानीय पारंपरिक हस्तकला को संरक्षित करने के लिए प्रेरित किया।
