सेवानिवृत्ति के बाद एक अध्यापक की नई उड़ान ,कांगड़ा के जीवन सिंह राणा बने ड्रैगन फ्रूट खेती की प्रेरणा

सेवानिवृत्ति के बाद एक अध्यापक की नई उड़ान ,कांगड़ा के जीवन सिंह राणा बने ड्रैगन फ्रूट खेती की प्रेरणा

कांगड़ा 22 दिसंबर चम्बा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)

कांगड़ा जिला के नगरोटा सूरियां क्षेत्र के घार जरोट गांव निवासी जीवन सिंह राणा ने यह सिद्ध कर दिया है कि सेवानिवृत्ति जीवन का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का अवसर हो सकता है। शिक्षा विभाग में प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाकर ड्रैगन फ्रूट जैसी लाभकारी फसल की सफल खेती शुरू की और आज सैकड़ों किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।सितंबर 2020 में पंजाब के बरनाला स्थित ड्रैगन फ्रूट फार्म का भ्रमण कर इस फसल की तकनीक सीखने के बाद जीवन सिंह राणा ने अपने बेटे, सिविल इंजीनियर आशीष राणा और पत्नी कुन्ता राणा के साथ मिलकर खेती की शुरुआत की।

हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने 6 कनाल भूमि में ड्रैगन फ्रूट के 450 पौधे लगाए। मेहनत का परिणाम यह रहा कि दूसरे ही सीजन में उन्हें 1.25 लाख रुपये की आय हुई, जबकि इस वर्ष अब तक 26 क्विंटल उत्पादन से लगभग 7 लाख रुपये की आमदनी हो चुकी है।वर्तमान में उनके बाग में 1125 पोल पर 4500 से अधिक ड्रैगन फ्रूट पौधे लगे हैं। वे पूरी तरह प्राकृतिक खेती करते हैं और किसी भी रासायनिक खाद या कीटनाशक का प्रयोग नहीं करते। इसके साथ-साथ वे स्ट्रॉबेरी, अनाज, दलहन, सब्जियां तथा अमरूद, पपीता, जामुन जैसे फलदार पौधों की भी खेती कर रहे हैं।उपनिदेशक उद्यान अलक्ष पठानिया ने बताया कि जिला कांगड़ा में ड्रैगन फ्रूट की खेती को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।

वर्तमान में लगभग 3 हेक्टेयर क्षेत्र में यह फसल उगाई जा रही है और किसानों को प्रति हेक्टेयर 3.37 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है।जीवन सिंह राणा की सफलता यह संदेश देती है कि लगन, नवाचार और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से गांव में रहकर भी सम्मानजनक जीवन और अच्छी आय संभव है।

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