कांगड़ा कार्निवाल की सांस्कृतिक संध्या ने बांधा समां, लोक-संस्कृति और आधुनिक संगीत का अनूठा संगम

कांगडा 24 दिसम्बर मुकेश कुमार (गोल्डी)
कांगड़ा कार्निवाल के दौरान आयोजित सांस्कृतिक संध्या में संगीत, हास्य और लोक-परंपराओं की सुरीली स्वर लहरियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में देश-विदेश के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से उत्सव के माहौल को जीवंत बना दिया। विशेष रूप से केरल के प्रसिद्ध बैंड थाइकुडम ब्रिज के ऊर्जावान संगीत ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया और संध्या को यादगार बना दिया।धर्मशाला क्षेत्र के खनियारा से आए शहनाई वादकों ने अपने प्राचीन वाद्य यंत्रों के माध्यम से मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। उनकी सुरमयी धुनों ने दर्शकों को हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया। इसके अतिरिक्त विभिन्न बैंड और सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियों ने कार्निवाल की रौनक को और बढ़ा दिया।इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि कांगड़ा कार्निवाल जिला कांगड़ा की लोक-संस्कृति, कला, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को सशक्त मंच प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है।

उन्होंने कहा कि ऐसे उत्सव स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ पर्यटन को भी नई दिशा प्रदान करते हैं, जिससे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित होते हैं।उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कांगड़ा जिले के लिए यह गर्व का क्षण है कि कांगड़ा वैली कार्निवल को हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से सरकारी उत्सव का दर्जा दिया गया है। जारी अधिसूचना के अनुसार यह कार्निवल अब प्रतिवर्ष 24 से 31 दिसंबर तक पुलिस मैदान, धर्मशाला में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कांगड़ा कार्निवाल 2025 देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर कांगड़ा घाटी की पहचान को वैश्विक स्तर पर और सुदृढ़ करेगा।इस अवसर पर पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष आर.एस. बाली सहित कई जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित