हिमाचल में निराश्रितों के लिए ‘सरकार ही परिवार’, मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना बनी सामाजिक सुरक्षा का मॉडल

ऊना 01 जनवरी चम्बा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)
हिमाचल प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक प्रभावी और मानवीय पहल के रूप में उभरकर सामने आई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के संवेदनशील दृष्टिकोण से शुरू हुई यह योजना अभिभावक-विहीन बच्चों, निराश्रित महिलाओं, असहाय बुजुर्गों और अन्य कमजोर वर्गों को सम्मानजनक जीवन का आधार प्रदान कर रही है। बीते दो वर्षों में लगभग 64 करोड़ रुपये के व्यय के साथ यह योजना हजारों परिवारों के लिए संबल बनी है।ऊना जिले में भी योजना के तहत बीते दो वर्षों में लगभग पौने चार करोड़ रुपये की सहायता जारी की गई है। इससे निराश्रित बच्चों को सुरक्षा, शिक्षा और बेहतर भविष्य का अवसर मिला है। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हिमाचल देश का पहला राज्य बना है, जिसने अनाथ बच्चों को “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” का कानूनी दर्जा दिया है। प्रदेश में करीब 6,000 निराश्रित बच्चों की 27 वर्ष की आयु तक संपूर्ण देखभाल की जिम्मेदारी सरकार उठा रही है।योजना के अंतर्गत बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, भोजन और परवरिश की पूरी व्यवस्था की जा रही है। लाभार्थी बच्चों को मासिक पॉकेट मनी, उच्च शिक्षा के लिए सहायता, छात्रावास या किराए का प्रावधान उपलब्ध कराया गया है। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्टार्टअप शुरू करने हेतु दो लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है।इसके अतिरिक्त विवाह सहायता, आवास निर्माण के लिए भूमि और धनराशि, वस्त्र अनुदान तथा उत्सव भत्ता जैसी सुविधाएं भी योजना में शामिल हैं। कांगड़ा जिले के लुथान में 132 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सुख-आश्रय परिसर भविष्य में सामाजिक सुरक्षा का मॉडल केंद्र बनेगा।उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने बताया कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचे। मुख्यमंत्री सुक्खू का स्पष्ट संदेश है—जिनका कोई नहीं, उनके लिए सरकार ही परिवार है।