16वें वित्त आयोग का आरडीजी समाप्त करना हिमाचल की जनता के अधिकारों पर कुठाराघात

16वें वित्त आयोग का आरडीजी समाप्त करना हिमाचल की जनता के अधिकारों पर कुठाराघात

16वें वित्त आयोग का आरडीजी समाप्त करना हिमाचल की जनता के अधिकारों पर कुठाराघात

शिमला 08 फरवरी चम्बा न्यूज एक्सप्रेस (ब्यूरो)

आज राज्य की वित्तीय स्थिति और 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) समाप्त किए जाने के प्रभावों को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति के दौरान एक सच्चाई स्पष्ट रूप से सामने आई कि यह निर्णय किसी विशेष सरकार के विरुद्ध नहीं, बल्कि सीधे तौर पर हिमाचल प्रदेश की जनता के अधिकारों के खिलाफ है। विशेषज्ञों और वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह फैसला राज्य के साथ न्याय नहीं, बल्कि सौतेला व्यवहार दर्शाता है।हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है, जहां संसाधन सीमित हैं।

यहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास कार्यों की लागत मैदानी राज्यों की तुलना में कहीं अधिक होती है। इसके साथ ही राज्य बार-बार प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाओं से जूझता रहा है, जिससे पहले से कमजोर आर्थिक ढांचे पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। ऐसे में राजस्व घाटा अनुदान राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा रहा है।प्रस्तुति में यह भी सामने आया कि जीएसटी जैसी उपभोग आधारित कर व्यवस्था लागू होने के बाद हिमाचल जैसे राज्यों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

जब राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा आरडीजी पर निर्भर रहा हो, तब इसे अचानक समाप्त करना विकास योजनाओं, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और आम जनता की बुनियादी जरूरतों पर सीधा प्रहार है।वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा राजनीति से ऊपर उठकर हिमाचल की अस्मिता, उसके संवैधानिक अधिकारों और उसके भविष्य से जुड़ा है। राज्य की जनता के हक़ की रक्षा के लिए यह आवाज़ दबाई नहीं जा सकती। हर मंच और हर स्तर पर इस निर्णय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा, ताकि हिमाचल प्रदेश के साथ न्याय सुनिश्चित किया जा सके और उसके विकास की गति बाधित न हो।

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