सीबीएसई मान्यता और शिक्षक कैडर को लेकर अध्यापक संघ ने जताई आपत्तियां

सीबीएसई मान्यता और शिक्षक कैडर को लेकर अध्यापक संघ ने जताई आपत्तियां

डलहौजी/ चम्बा 19 फरवरी मुकेश कुमार (गोल्डी)

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कुछ सरकारी पाठशालाओं की मान्यता हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से बदलकर Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) से कराने तथा शिक्षकों का अलग सब-कैडर बनाने के निर्णय पर शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बन गई है। इस संदर्भ में हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ जिला चंबा इकाई ने सरकार की अधिसूचना पर गंभीर शंकाएं व्यक्त की हैं।संघ के जिला प्रधान हरिप्रसाद शर्मा, महासचिव सतेंद्र राणा, वित्त सचिव विशाल शर्मा, राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुकेश शर्मा, राज्य उपाध्यक्ष सुरेंद्र मोहन, महिला विंग जिला प्रधान रीनू शर्मा सहित जिला एवं खंड स्तर की समस्त कार्यकारिणियों ने कहा कि सीबीएसई पाठशालाओं में कार्यरत होने वाले अध्यापकों की पूर्व वरिष्ठता का क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। साथ ही, प्रमोशन चैनल किस प्रकार से संचालित होगा, इस पर भी कोई ठोस दिशा-निर्देश अधिसूचना में नहीं हैं।संघ ने सरकारी पाठशालाओं में पहले से कार्यरत अध्यापकों को सीबीएसई स्कूलों में नियुक्ति देने के लिए अनिवार्य टेस्ट लेने के निर्णय को “बेतुका फरमान” बताया है। संघ का कहना है कि टेस्ट के लिए 500 रुपये फीस निर्धारित की गई है, जबकि परीक्षा केंद्र कहां होगा इसकी जानकारी नहीं दी गई है। इसके अतिरिक्त, किसी भी प्रकार का ट्रैवलिंग अलाउंस नहीं दिया जा रहा, जबकि ज्वाइन करना अनिवार्य बताया गया है।अध्यापकों का तर्क है कि वे वर्षों से शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं और उनके पास पर्याप्त अनुभव है, ऐसे में सीबीएसई पाठशालाओं के लिए टेस्ट की अनिवार्यता समझ से परे है। संघ ने इसे आनन-फानन में लिया गया निर्णय बताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार की मांग की है और अध्यापक साथियों को टेस्ट से छूट देने की अपील की है।संघ के प्रधान ने कहा कि सरकार को ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले शिक्षक संगठनों से विचार-विमर्श करना चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर आने वाली दिक्कतों को समय रहते दूर किया जा सके और हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में अग्रणी बना रहे।

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