भारत अमेरिका व्यापार समझौता हिमाचल के किसानों के साथ अन्याय -: मनीष सरीन

चम्बा 20 फरवरी मुकेश कुमार (गोल्डी)
डलहौज़ी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस (INC) कार्यकर्ता मनीष सरीन ने हाल ही में घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर हिमाचल प्रदेश के सेब उद्योग पर संभावित दुष्प्रभावों की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि यदि आयात शुल्कों में ढील दी गई तो इससे राज्य की बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।सरीन के अनुसार हिमाचल का सेब उद्योग प्रतिवर्ष लगभग ₹5,000 करोड़ का कारोबार करता है और करीब 2.5 लाख परिवारों की आजीविका इससे प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़ी है। बागवानों के अलावा मजदूर, ट्रांसपोर्टर, पैकेजिंग कर्मी, कोल्ड-स्टोरेज संचालक और छोटे व्यापारी भी इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। ऐसे में आयातित सेब और ड्राई-फ्रूट पर शुल्क कम होने से स्थानीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।उन्होंने कहा कि पहले ही उर्वरक, कीटनाशक, पैकेजिंग, परिवहन और श्रम लागत में वृद्धि से किसान परेशान हैं। विदेशी सब्सिडी-समर्थित उत्पादों से प्रतिस्पर्धा हिमाचल के किसानों के लिए कठिन साबित हो सकती है। सरीन ने प्रदेश भाजपा नेतृत्व और हिमाचल के सात सांसदों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य के प्रमुख आर्थिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपेक्षित था।प्रेस वक्तव्य में केंद्र सरकार से व्यापार समझौते का पूरा विवरण सार्वजनिक करने, सेब उत्पादक राज्यों से परामर्श करने और न्यूनतम आयात मूल्य जैसे सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की गई है। सरीन ने कहा कि घरेलू कृषि की सुरक्षा संरक्षणवाद नहीं, बल्कि आर्थिक विवेक है। उन्होंने जोर दिया कि हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लाखों परिवारों की आजीविका को जोखिम में नहीं डाला जाना