विधवाओं की बेटियों के सशक्तिकरण के लिए ट्रस्ट का संकल्प, शिक्षा व कौशल विकास पर विशेष जोर

विधवाओं की बेटियों के सशक्तिकरण के लिए ट्रस्ट का संकल्प, शिक्षा व कौशल विकास पर विशेष जोर

डलहौजी/चम्बा 08 मार्च मुकेश कुमार (गोल्डी)

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक सामाजिक ट्रस्ट ने विधवाओं की बेटियों के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने के उद्देश्य से विशेष पहल शुरू करने की घोषणा की है। ट्रस्ट की अध्यक्षा किरण डोडेजा ने बताया कि ट्रस्ट पहले से ही गरीब विधवाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करता रहा है और कई जरूरतमंद महिलाओं को नियमित सहयोग दिया जा रहा है। इसके साथ ही चंबा जिले की लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) पाठ्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।किरण डोडेजा ने कहा कि अब ट्रस्ट विशेष रूप से विधवाओं की बेटियों के लिए काम करने के लिए संकल्पित है। वर्षों के अनुभव से यह सामने आया है कि कई विधवाओं की बेटियां मैट्रिक या 10+2 के बाद अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पातीं और विभिन्न सामाजिक व आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ देती हैं। कई मामलों में माताएं अपनी बेटियों की कम उम्र में ही शादी कर देती हैं, चाहे लड़के का रोजगार हो या न हो। इसका मुख्य कारण यह होता है कि वे बेटियों को अपने ऊपर बोझ समझने लगती हैं और जल्द से जल्द अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहती हैं।

ट्रस्ट ने ऐसे परिवारों और बेटियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए स्वयंसेवकों और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की सहायता से पंचायत रिकॉर्ड और भौतिक सर्वेक्षण के माध्यम से जानकारी एकत्रित की जा रही है। चंबा के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. बिपिन ठाकुर ने ब्रंगाल क्षेत्र की कई पंचायतों का विवरण जुटाने में अहम भूमिका निभाई है। वहीं साहिब सिंह और कुलदीप सिंह ने हिमगिरी तथा बगढार/खैरी क्षेत्रों में इस कार्य की जिम्मेदारी संभाली है।ट्रस्ट का उद्देश्य विधवाओं को जागरूक कर उन्हें प्रेरित करना है कि वे अपनी बेटियों की कम उम्र में शादी न करें, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा और कौशल विकास के अवसर प्रदान करें। ट्रस्ट इसके लिए आर्थिक सहयोग भी देगा। दूरदराज क्षेत्रों की जरूरतमंद लड़कियों को प्रस्तावित गर्ल्स हॉस्टल में निःशुल्क आवास सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही एनआईओएस और शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में भी उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा प्रशिक्षण पूरा होने के बाद आत्म-रोजगार के लिए आवश्यक किट भी प्रदान की जाएगी।

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