“खपत घटाने की अपील पर सियासत तेज: मनीष सरीन ने उठाए आर्थिक हालात पर सवाल”

“खपत घटाने की अपील पर सियासत तेज: मनीष सरीन ने उठाए आर्थिक हालात पर सवाल”

डलहौज़ी/ चम्बा 13 मई मुकेश कुमार (गोल्डी)

सामाजिक कार्यकर्ता एवं 2022 हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में डलहौज़ी क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी मनीष सरीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए देश की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा नागरिकों से सोना खरीदने से बचने, पेट्रोल-डीज़ल की खपत कम करने और खाद्य तेल का सीमित उपयोग करने की अपील यह संकेत देती है कि देश आर्थिक दबाव की स्थिति में है।सरीन ने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में “विश्वगुरु”, “5 ट्रिलियन इकोनॉमी” और “अमृतकाल” जैसे नारों के माध्यम से जनता को भ्रमित किया गया, जबकि जमीनी स्तर पर आर्थिक चुनौतियाँ लगातार बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि यदि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है, तो इस तरह की खपत कम करने की अपील की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था को लेकर दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया। सरीन ने नोटबंदी को अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रहार बताते हुए कहा कि इससे छोटे व्यापार, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ।इसके अलावा उन्होंने जीएसटी के क्रियान्वयन, बढ़ती बेरोज़गारी, ईंधन पर उच्च कर दरों और सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश को भी आर्थिक कमजोरी के प्रमुख कारणों में गिना। सरीन के अनुसार, महंगाई, बेरोज़गारी और आय असमानता से आम जनता परेशान है, जबकि सरकार इन मुद्दों पर ठोस जवाब देने से बच रही है।अंत में उन्होंने केंद्र सरकार से देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति, विदेशी मुद्रा भंडार और आयात निर्भरता जैसे मुद्दों पर पारदर्शिता बरतने की मांग की और कहा कि अब देश को नारों नहीं, बल्कि जवाबदेही और ठोस नीतियों की आवश्यकता है।

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