सरकार द्वारा कम छात्र संख्या के आधार पर कॉलेज बंद करना दुर्भाग्यपूर्ण फैसला :- विधायक डीएस ठाकुर

सरकार द्वारा कम छात्र संख्या के आधार पर कॉलेज बंद करना दुर्भाग्यपूर्ण फैसला :- विधायक डीएस ठाकुर

डलहौजी/ चम्बा 07 जून मुकेश कुमार (गोल्डी)

डलहौजी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डीएस ठाकुर ने प्रदेश सरकार द्वारा कम छात्र संख्या वाले महाविद्यालयों के विलय एवं बंद किए जाने के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने राजकीय महाविद्यालय भलेई को बंद करने के निर्णय को गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ सीधा अन्याय करार दिया है।विधायक ने कहा कि भलेई जैसे दुर्गम क्षेत्र में स्थित यह महाविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों, विशेषकर छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों को बंद करने के बजाय सरकार को इन्हें सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए थे।डीएस ठाकुर ने आरोप लगाया कि कॉलेज में छात्र संख्या घटने के लिए सरकार, शिक्षा मंत्री और विभागीय नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों तक न तो पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की गई और न ही स्थायी भवन निर्माण के लिए गंभीर प्रयास हुए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व जयराम सरकार के कार्यकाल में इस कॉलेज के भवन निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन उसके बावजूद अपेक्षित विकास नहीं हो सका।उन्होंने कहा कि बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के अभाव में विद्यार्थियों का रुझान धीरे-धीरे कम होता गया, जिसका खामियाजा अब कॉलेज बंद करने के रूप में सामने आ रहा है। विधायक ने बताया कि कॉलेज की स्थापना के शुरुआती वर्षों में यहां लगभग 350 विद्यार्थी अध्ययनरत थे और क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं ने इसी संस्थान से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।विधायक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भलेई और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कई छात्राएं आर्थिक और सामाजिक कारणों से दूरदराज के शहरों में पढ़ाई के लिए नहीं जा सकतीं। ऐसे में कॉलेज का बंद होना उनके लिए उच्च शिक्षा के रास्ते बंद करने जैसा है।उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को पहले भी विधानसभा में उठा चुके हैं और आगामी सत्र में एक बार फिर मजबूती से सरकार के सामने रखेंगे। साथ ही उन्होंने सरकार से भलेई कॉलेज को बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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