चंबा में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, 80 रुपये MSP पर गेहूं खरीद से किसानों की आय में बढ़ोतरी

चंबा 16 जुलाई मुकेश कुमार (गोल्डी)
हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदम अब धरातल पर प्रभावी परिणाम देने लगे हैं। सरकार द्वारा प्राकृतिक रूप से उत्पादित गेहूं के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किया गया है, जो देश में अपनी तरह का अनूठा प्रयास है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश ऐसा एकमात्र राज्य बन गया है, जहां प्राकृतिक गेहूं की सरकारी खरीद इतने आकर्षक मूल्य पर की जा रही है।जिला चंबा में भी इस पहल का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। वर्ष 2026 में जिले के 133 किसानों से 185.92 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं की खरीद की गई, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या मात्र 39 किसानों तक सीमित थी।

इस उल्लेखनीय वृद्धि से स्पष्ट है कि जिले के किसान अब पारंपरिक रासायनिक खेती से हटकर टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल प्राकृतिक खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।इस वर्ष प्राकृतिक गेहूं की खरीद तीन प्रमुख संग्रह केंद्रों के माध्यम से की गई। सिविल सप्लाई संग्रह केंद्र चंबा में 91.08 क्विंटल, चुवाड़ी केंद्र में 83.28 क्विंटल तथा बनीखेत केंद्र में 11.56 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई। इन आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि जिले के विभिन्न विकास खंडों के किसान इस योजना से जुड़कर लाभ उठा रहे हैं।परियोजना निदेशक (आत्मा) नितिन कुमार शर्मा ने बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल किसानों को अधिक मूल्य दिलाने में सहायक है, बल्कि यह टिकाऊ कृषि प्रणाली की मजबूत नींव भी है।

इससे उत्पादन लागत घटती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।सरकार ने मक्की (50 रुपये/किग्रा), पांगी घाटी के जौ (80 रुपये/किग्रा), कच्ची हल्दी (150 रुपये/किग्रा) और अदरक (30 रुपये/किग्रा) के लिए भी आकर्षक एमएसपी तय किए हैं। इन प्रयासों से किसानों की आय में स्थायी वृद्धि के साथ प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिल रहा है।