एससी/एसटी विकास निधि कानून की मांग तेज, डलहौजी में एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा

एससी/एसटी विकास निधि कानून की मांग तेज, डलहौजी में एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा

डलहौजी/चम्बा 25 अगस्त मुकेश कुमार (गोल्डी)

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निधि कानून लागू करने की मांग को लेकर राज्य गठबंधन हिमाचल की विधानसभा इकाई डलहौजी ने मंगलवार को एसडीएम डलहौजी अनिल भारद्वाज के माध्यम से मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधियों ने प्रदेश सरकार से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और राजस्थान की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी एससी/एसटी विकास निधि के लिए अलग कानून बनाने की मांग उठाई।ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश के कुल योजना बजट में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के अनुपात में बजट का प्रावधान अनिवार्य किया जाना चाहिए।

प्रतिनिधियों के अनुसार अनुसूचित जाति की आबादी करीब 33 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की करीब 8 प्रतिशत है। इसलिए विकास निधि का आवंटन भी इसी अनुपात के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही आवंटित धनराशि का पारदर्शी तरीके से उपयोग केवल एससी/एसटी समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए सुनिश्चित करने की मांग की गई।गठबंधन ने भूमिहीन एससी/एसटी परिवारों को आवासीय और कृषि योग्य भूमि उपलब्ध करवाने की मांग भी उठाई। प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्ष 1980 में एससी घटक योजना शुरू होने के बावजूद हिमाचल में इसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया। उनका आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में बजट आवंटन करीब पांच प्रतिशत तक सीमित रहा है, जबकि जनसंख्या के अनुपात में यह कहीं अधिक होना चाहिए।

प्रतिनिधियों ने बताया कि 11 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रस्तावित कानून का मसौदा विधेयक भी सौंपा गया था, साथ ही सरकार ने चुनावी घोषणा-पत्र में इस कानून को लागू करने का वादा किया था। उन्होंने मांग की कि आगामी मानसून सत्र में कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।इस अवसर पर मुकेश कुमार, अजय नाहर, अश्वनी साहिल और धीरज कल्याण सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि कानून बनने तक शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखा जाएगा।

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